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मजहब नही सिखाता आपस में बैर रखना – इन पंक्तियों को जीवन मे उतारते है डॉ एन कृष्णमूर्ति आचारी

प्रकाशनार्थ

मजहब नही सिखाता आपस में बैर रखना – इन पंक्तियों को जीवन मे उतारते है डॉ एन कृष्णमूर्ति आचारी

जो ढूंढेगा, उसे मिलेगा- आनंदश्री

मुम्बई- माटुंगा 3.04.21
धर्म वरदान है। मनुष्य के सभ्यता का जीने का सलीका बताती है धर्म। यही धर्म जब झगड़े का कारण बन जाती है तो श्राप बन जाती है।

मदुराई तमिलनाडु में जन्मे एन कृष्णमूर्ति आज मिसाल है हिन्दू- मुस्लिम एकता का। उनके एक 786 कलेक्शन ने विश्व मे भाईचारे का संदेश देते है। कृष्णमूर्ति की माँ तंगममाल तथा पिता नागलिंगम भी नही जानते थे कि उनके कोख से किस हस्ती ने जन्म लिया है।

मुम्बई में माटुंगा रेलवे वोर्कशॉप में कार्यरत एन कृष्णमूर्ति ( रिटायर मेन्ट के लिए कुछ ही समय बचे है ) माटुंगा लेबर केम्प में रहते है। अपने कार्य मे निपुण एन कृष्णमूर्ति की पहचान उनके 786 कलेक्शन में दिलाई। आज उनके पास करीब 3033 के 237 अलग अलग कैटगरी है। जिसमे उनके पास 786 नम्बर के एल आय सी पालिसी, टिकट, त शर्ट, कप, मास्क, बुक, ऐसे 237 कैटगरी है।

वह बताते है कि बचपन मे उनके बेंच पर सैयद नाम का सहपाठी उनके साथ बैठता था। दोनों नए कॉपी पर शुरू में ॐ और 786 लिखते थे। बस वंही से बालक कृष्णमूर्ति को 786 के प्रति आस्था और खिंचाव आ गया। भले ही वह हिन्दू है लेकिन उनकी 786 की खोज जारी है।

आज इन्ही शौक और खोज ने उन्हें कई बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में उनका नाम दर्ज कराया है। यंहा तक कि ओ एम जी बुक ऑफ रिकॉर्ड में तीन बार नाम दर्ज हुआ है।

मिलनसार, सामाजिक, सकारात्मक,मददगार, एकता भाईचारा का संदेशवाहक एन कृष्णमूर्ति को पढ़ाना भी अच्छा लगता है। वे कहते है कि रिटायर के बाद वे नये रिकॉर्ड बनाने वाले युवाओं को मार्गदर्शन करेंगे। उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे। जबकि अभी से ही उन्होंने यह कार्य शुरू कर दिया है। वे कई संस्था से जुड़े है जैसे हॉबी क्लब। वंहा भी एन कृष्णमूर्ति सभी को अपनी सेवा और मदद करते रहते है।

पुनर्जन्म के बारे में पूछने पर बताते है कि वे फिर से एन कृष्णमूर्ति बनना चाहते है। जो कार्य इन्होंने नही किया वह सारे कार्य जोरशोर से करना चाहते है।
वे गरीब और जरूरत मंदो की सेवा करना चाहते है।

अपने इंटरव्यू में उन्होंने अपनी पत्नी जयंती, दोनों लड़के, हॉबी क्लब के मित्र, उनके रेलवे मित्र एवं सहकर्मी कर्मचारी, रिश्तेदार एवं जिन्होंने प्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष रूप से सहायता की सभी को आभार प्रकट किया।

उनकी कहानी बताती है कि जो ढूंढता है उसे मिलता है फिर चाहे वह 786 हो, ईश्वर हो, पैसा हो , काम हो या विश्वास हो। ढूंढ़िए आपको मिलेगा।

प्रो डॉ दिनेश गुप्ता- आनंदश्री
आध्यात्मिक व्याख्याता एवं माइन्डसेट गुरु
मुम्बई

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