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फ़र्ज़ी ड्रग्स केस में गिरफ्तार हनीमून के लिए कतर गए पति-पत्नी 2 साल बाद लौटे अपने देश। पत्नी ने जेल में ही बच्ची को दिया था जन्म।

फ़र्ज़ी ड्रग्स केस में गिरफ्तार हनीमून के लिए कतर गए पति-पत्नी 2 साल बाद लौटे अपने देश। पत्नी ने जेल में ही बच्ची को दिया था जन्म।

मुंबई:-मनोज दुबे

कतर में धोखे से ड्रग्स केस में फंसाए गए पति-पत्नी को बड़ी राहत मिली है। मुंबई के रहने वाले शरीक कुरेशी और उनकी पत्नी ओनिबा कुरेशी दो साल पहले कतर में हनीमून मनाने गए थे और वहां एक फर्जी ड्रग केस में फंस गए थे। अब आखिरकार दो साल बाद दोनों पति-पत्नी घर लौट आए हैं। दोनों बुधवार आधी रात को मुंबई लौट आए। दंपति को ड्रग केस में दस साल जेल की सजा सुनाई गई थी। लेकिन मामले की जांच भारत में NCB ने की और जांच के दौरान ये साफ हो गया कि दोनों पति-पत्नी निर्दोष है जिसके बाद उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया। दंपति की एक बेटी भी है जो जेल में पैदा हुई थी।

ऐसा पहली बार हुआ है कि जब किसी मामले की जांच भारत में की गई और विदेश की अदालत में सुनवाई हुई। पति-पत्नी को विदेश की अदालत ने बेगुनाह माना और बाइज्जत बरी कर दिया।
दरअसल, 2019 में जब ये पति-पत्नी शादी के बाद हनीमून पर कतर जा रहे थे तो उनके बैग में उनके किसी रिश्तेदार ने बिना बताये खाने की चीज बताकर मादक पदार्थ रख दिये थे।जहां एयरपोर्ट पे इनको गिरफ्तार कर लिया गया था और उनकी मुश्किलें खड़ी हो गई।हालांकि भारतीय अधिकारियों की पैरवी के बाद आखिरकार उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। दंपति को जुलाई 2019 में कतर के अधिकारियों ने हमद अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा पर लगभग 4 किलोग्राम चरस के साथ गिरफ्तार किया था।

बैग में चरस को देखकर दोनों के पैरों तले की जमीन खिसक गई। दोनों लगातार कस्टम और दोहा पुलिस को यह बताते रहते हैं कि वह बेगुनाह हैं लेकिन दोनों की कोई भी बात सुनने कोई तैयार ना था। दोनों पर मामला दर्ज किया जाता है और जेल भेज दिया जाता है।
लेकिन बाद में यह पता चला कि शारिक की चाची तबस्सुम कुरैशी ने मादक पदार्थ की तस्करी के लिए उनका इस्तेमाल किया।तबस्सुम पैसे से ड्रग्स तस्करी करने वाली महिला है। तबस्सुम ने ही उनकी यात्रा का बंदोबस्त किया था।घटना के वक्त शारिक जापान की एक कंपनी में कार्यरत था और ओनिबा को उनके गर्भवती होने का पता चला था। ओनिबा ने पिछले साल फरवरी में जेल में बेटी आयत को जन्म दिया था
दंपति के परिजनों ने भारत सरकार से संपर्क कर मामले में दखल देने की मांग की थी।
इसके बाद एनसीबी ने कतर में अधिकारियों से संपर्क किया।दंपति ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी। अंत में दंपति को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
ओनिबा और शरीक के जेल में रहने के दौरान इनके परिवार ने भारत में NCB से मदद मांगी। NCB के डायरेक्टर राकेश अस्थाना और डिप्टी डायरेक्टर केपीएस मल्होत्रा की अगुआई में इस मामले में जांच शुरू हुई। शरीक के मोबाइल फोन की जांच के बाद NCB को उनकी बेगुनाही का पहला सबूत मिला। इसमें उसकी सगी बुआ तबस्सुम की वो आवाज कैद थी, जो ये बता रही थी कि कैसे उसने पान के जर्दा के नाम पर शरीक के बैग में चरस रख दिया था।
इस सबूत के हाथ लगते ही NCB ने चंडीगढ़ में एक छापा मारा और बुआ समेत एक अन्य को अरेस्ट किया। जांच में सामने आया कि बुआ ने ही इस हनीमून पैकेज को स्पांसर किया था।
दोनों का पूरा परिवार कई घंटे से एयरपोर्ट के बाहर इंतजार में खड़ा था। उनसे मिलकर सभी एक दूसरे के गले लगकर रोने लगे। तीनों की वतन वापसी में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के डायरेक्टर राकेश अस्थाना और डिप्टी डायरेक्टर केपीएस मल्होत्रा की बड़ी भूमिका रही।

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