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रमजान का आखरी अशरा काफी अहमियत का हामिल है। इस महीने की 21,23,25,27, 29वी शब में शब ए कद्र होती,जिसकी बहुत सारी फजीलत आई है।

रमज़ान का आखरी अशरा, अहमियत का हामिल।
******* पेशकश,,, सोशल एक्टिविस्ट,नाज़ परवीन/ फैज शेरवानी ।

रमजान का आखरी अशरा काफी अहमियत का हामिल है। इस महीने की 21,23,25,27, 29वी शब में शब ए कद्र होती,जिसकी बहुत सारी फजीलत आई है।

ज़िशान काज़मी

शबे कद्र के मुताल्लिक बड़ा इख्तेलाफ़ है कि वह कौन सी रात है। मगर मशहूर यह है कि रमजान शरीफ की सत्ताईसवीं रात है इमाम शारानी रहमतुल्लाह तआला अलैहि ने शबे क़द्र की कुछ अलामतें ब्यान फरमाई हैं कि यह रात चमकदार और शफ़ाक़ होगी। न ज्यादा गर्म और न ज्यादा ठंडी मुअतदल होगी। इस रात में न बादल होंगे न ही बारिश होगी। और न सितारे टूटेंगे जो शैतानों को मारे जाते हैं। और इस रात की सुबह को सूरज बगैर शुआअ के निकलेगा। और इस रात में कुत्ते नहीं भोंकते ।

बाज़ हजरात फ़रमाते हैं कि शबे कद्र में समुंद्रों और दरियाओं का पानी मीठा हो जाता है और इंसानों और जिन्नों के सिवा तमाम चीजें सज्दा में गिर जाती हैं मगर इन बातों का इल्म साहब कश्फ को होता है हर एक शख्स को पता नहीं चलता।
_फ़रमाने रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम :-_ नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया शबे क़द्र को रमज़ान के आखिरी दहे की ताक रातों में तलाश करो। तमाम उलेमा अहले सुन्नत वल जमाअत का इस पर इत्तेफाक है कि शबे कद्र माहे रमज़ानुल मुबारक की सत्ताईसवीं रात है इस एक रात में इबादत करने का सवाब हजार माह की इबादत से ज्यादा है।

शबे कद्र में दुआ कुबूल होती है :-

शबे कद्र में एक ऐसी साअत है कि जिसमें जो दुआ मांगी जाये वह कुबूल होती है।
लिहाज़ा मुसलमानों को चाहिये कि शबे कद में ऐसी जामेअ दुआ मांगे जो दोनों जहानों में फायदा बख़्शे।
मसलन अपने गुनाहों की बख्शिश ,और रज़ाए इलाही के हुसूल की दुआ मांगी जाये। _उम्मुल मोमिनीन सैयदा हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा फ़रमाती हैं_

तर्जमा :-

मैनें अर्ज़ किया या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आप बतायें कि अगर मुझे लैलतुल क़द्र (शबे कद्र) का पता चल जाये तो मैं कौन सी दुआ मांगू।
आपने इरशाद फरमाया कि तू यह दुआ मांग । ऐ अल्लाह ! बेशक तू माफ़ करने वाला है और माफ़ी को दोस्त रखता है ,मुझे भी माफ़ कर दे।
मतलब यह है कि इस रात अपने परवरदिगार से माफ़ी की दरख्वास्त करता रहे।
रमजान के इस आखरी अशरे में,इबादत के साथ साथ, खास तौर पर दुआओ का अहतमाम रखे,अपने और सभी के लिए,मुल्क अवाम के लिए दुआ कीजिए।

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