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नहीं रहे दारुल उलूम देवबंद के वरिष्ठ उस्ताद और अरेबिक विद्वान मौलाना नूर आलम खलील अमीनी, इस्लामिक जगत में शोक की लहर।

~ इंतेकाल ए पुर मलाल ~

नहीं रहे दारुल उलूम देवबंद के वरिष्ठ उस्ताद और अरेबिक विद्वान मौलाना नूर आलम खलील अमीनी, इस्लामिक जगत में शोक की लहर।

देवबंद, उत्तर प्रदेश/ जिशान काजमी ।

प्राप्त जानकारी के अनुसार दारुल उलूम देवबंद के वरिष्ठ उस्ताद और अरेबिक मैगजीन अल-दाई के संपादक मौलाना नूर आलम खलील अमीनी का बीमारी के चलते देर रात निधन हो गया है। उनके इंतकाल की खबर से इस्लामिक जगत है शोक की लहर दौड़ गई।
मौलाना नूर आलम खलील अमीनी पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे, देवबंद और मुजफ्फरनगर के बाद उन्हें मेरठ के आनंद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां से तबीयत ठीक होने के बाद छुट्टी मिल गई थी लेकिन देर रात फिर तबीयत बिगड़ने के कारण उनका इंतकाल हो गया है।
मौलाना नूर आलम खलील अमीनी दुनिया में भर के इस्लामिक जगत में बड़ा नाम थे वह अरबी के बड़े विद्वान थे। उन्हें इस्लामिक जगत में बहुत इज्जत वे एहतराम की निगाह से देखा जाता था।
मौलाना को कई दिनों से इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी हालत में उतार-चढ़ाव था। लेकिन आज रात करीब एक बजे अचानक तबीयत बिगड़ने की सूचना मिली और सुबह तीन बजे फोन पर इंतकाल की सूचना मिली। दिवंगत मौलाना दारुल उलूम देवबंद के एक लोकप्रिय शिक्षक थे। उनके निधन से दारुल उलूम को बहुत नुकसान हुआ है। मौलाना अपनी अनोखी पहचान के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते थे। उनके निधन की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होते ही इल्मी और साहित्यिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। मौलाना के हजारों शागिर्द हैं जो पूरी दुनिया में धार्मिक और विद्वानों की सेवा कर रहे हैं।
18 दिसंबर 1952 को बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर जिले में जन्मे, वह एक प्रसिद्ध धार्मिक विद्वान और दारुल उलूम देवबंद में अरबी साहित्य के शिक्षक थे। उनकी पुस्तक, फिलिस्तीन ने सलाहुद्दीन की प्रतीक्षा की, असम विश्वविद्यालय से पीएचडी शोध प्रबंध का विषय था। मौलाना अमिनी एक अरबी भाषा के लेखक हैं और उनकी किताब मुफ्ता अल-अरबिया विभिन्न मदरसों में दर्स निज़ामी के पाठ्यक्रम में शामिल है।
बता दें कि मौलाना नूर आलम खलील अमीनी को उनकी अरबी जबान में दी जाने वाली सेवाओं के लिए राष्ट्रपति के हाथों विशेष सम्मानित किया जा चुका है।
उनके इंतकाल पर दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी और जमीअत उलमा ए हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी समेत बड़े उलेमा ने दुख प्रकट किया है। मौलाना के इंतकाल को दारुल उलूम देवबंद समेत इस्लामिक जगत के लिए बड़ा नुकसान बताया है।

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