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एक समय मसाले का कारोबार करने वाला इकबाल मेमन से बना इकबाल मिर्ची और बन गया इंटरनेशनल ड्रग्स माफिया

एक समय मसाले का कारोबार करने वाला इकबाल मेमन से बना इकबाल मिर्ची और बन गया इंटरनेशनल ड्रग्स माफिया

मुंबई:इंद्रदेव पांडे

पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल, इंटरनेशनल ड्रग्स तस्कर इब्राहिम मिर्ची से संबंधों के कारण मुश्किल में पड़ गये हैं। इकबाल मिर्ची की १४ अगस्त २०१३ को लंदन में मौत हो गयी थी। वह १९९३ में मुंबई बम धमाकों के बाद भारत छोड़कर भाग गया था। इकबाल मिर्ची का असली नाम इकबाल मेमन था लेकिन मसाले का कारोबार करने के कारण उसका नाम इकबाल मिर्ची पड़ गया था। उसे दाऊद इब्राहिम का खास आदमी कहा जाता था।


इकबाल मिर्ची का असली नाम इकबाल मोहम्मद मेमन था। बड़ा होने पर उसे अपने परिवार के मसाले के बिजनेस में कोई रुचि नहीं रही। पढ़ाई उसने हाईस्कूल के बाद ही छोड़ दी थी और अब मसाले का कम छोड़ कर टैक्सी चलाने लगा। कुछ महीनों बाद इकबाल को लगा कि टैक्सी चला कर वह अमीर नहीं बन सकता सो वह बंदरगाह के आसपास मंडराने लगा। वहां वो कंटेनरों से चोरी करके बाजार में माल बेचने लगा। इकबाल एक बड़े धंधेबाज आमिर से जुड़ गया लेकिन धीरे धीरे उसने आमिर को ही बाहर कर दिया। वह तेल, केमिकल, स्टील, बाल बियरिंग और ऑटो स्पेयर्स की तस्करी करने लगा। इसी दौरान वह करीम लाला और वरदराजन मुदलियार के गैंग्स से भी जुड़ गया। इकबाल ने ग्लोबल तस्करों ने तार जोड़े और ड्रग्स के धंधे में उतर गया। धीरे धीरे वह मैंड्रैक्स के धंधे को कंट्रोल करने लगा। ७० पैसे में बनी एक गोली २०० रुपए में बेची जाती थी। इसके अलावा वह गुजरात व राजस्थान से हेरोइन और हशीश की तस्करी यूरोप व अमेरिका को करता था। ड्रग्स की तस्करी के दम पर इकबाल ने मुंबई, दुबई, लंदन समेत कई शहरों में करोड़ों की संपत्ति बना ली थी। मुंबई में हाजी अली के पास उसका सी- फेसिंग आलीशान बंगला था। मुम्बई में उसने फिशरमैन व्हार्फ नामक नाइट क्लब खोला जहां पुलिस अफसरों और नेताओं की भी खूब आवाजाही होती थी। इसी क्लब में अंडरवल्र्ड और फिल्म स्टार्स का भी जमावड़ा हुआ करता था। नब्बे के दशक की शुरुआत में इकबाल मिर्ची की सालाना आय १५०० करोड़ रुपए आंकी गई थी। १९८६ में मिर्ची ने अपना बेस दुबई शिफ्ट कर दिया और वहां इंपीरियल सुइट्स नाम से होटल खोल दिया।

१९९३ में मुम्बई बम धमाकों में इकबाल मिर्ची का नाम जोड़ा गया। वजह ये थी कि कई षडयंत्रकारियों ने पूछताछ में उसका भी नाम लिया था। पुलिस और खुफिया एजेंसियों की जांच का दायरा बढ़ा तो पता चला कि मिर्ची का धंधा दुनिया भर में फैला हुआ था। मुंबई ब्लास्ट के बाद वह भारत से फरार हो गया था। उसने एक्ट्रेस हिना कौसर से दुबई में शादी की। हिना कौसर मुगल-ए-आजम के निर्देशक के. असिफ की बेटी थी।

इकबाल जब मसालों की दुकान में बैठा करता था तभी उसकी मुलाकात मुंबई के ‘भाई’ अनीस इब्राहीम से हुई, जो जल्द ही दोस्ती में बदल गई। कहते हैं कि यहीं से उस इकबाल ने ‘इकबाल मिर्ची’ बनना शुरू कर दिया। इसी सफर में वह आगे दाऊद के खास छोटा शकील के पास जा पहुंचा। इकबाल पढ़ा-लिखा भले नहीं था, लेकिन वह दिमाग का बहुत शातिर था। इसके चलते वह शकील का दिल जीतने में कामयाब रहा। रही सही कसर तब पूरी हो गई, जब ७० के दशक में उसने अनीस इब्राहीम की साली से शादी कर ली। अनीस की मदद से वह छोटा शकील के बाद दाऊद का सबसे खास आदमी बनने में कामयाब हो गया।

१९९३ में मुंबई बस धमाकों से ठीक एक दिन पहले उसने भारत छोड़ दिया और पाकिस्तान चला गया। बाद में वह वहां से लंदन चला गया। वहां वो पॉश एमरसन पार्क उपनगर में रहता था। अपनी जिंदगी के आखिरी वषोरं में उसने नाम को साफ करने की कोशिशें भी कीं। उसने भारत लौटने की पेशकश की लेकिन न्यायिक अभिरक्षा की शर्त के साथ। २०१२ में एक इंटरव्यू में उसने कहा था कि वह अपने देश को बहुत मिस करता है और वापस जाने के लिये कुछ भी करने को तैयार है। लंदन पुलिस ने अक्टूबर २०११ में उसे एक बिजनेसमैन को जान से मारने की धमकी के जुर्म में गिरफ्तार किया। उस वक्त भारत ने उसके प्रत्यर्पण की कोशिशें कीं, लेकिन लंदन पुलिस ने यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि इकबाल के खिलाफ सीबीआई के पास पुख्ता सबूत नहीं हैं। २०१३ में हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई।

इकबाल मिर्ची ने दाऊद के इशारे पर ड्रग्स की तस्करी शुरू की थी। वह दाऊद के साथ साए की तरह रहता था। वह बड़ी डील करने के लिए पांच सितारा होटलों में जाया करता था। बताया जाता है कि इकबाल एक डील करने के लिए एक फाइव स्टार होटल पहुंचा हुआ था, वहां उसकी नजर 19 साल की एंग्लोइंडियन लड़की इरा पर पड़ी। इकबाल उसकी तरफ आकर्षित हो गयाऔर उसने इरा से जान पहचान बढ़ाई। इस मुलाकात के बाद दोनों में मिलना-जुलना आम बात हो गई। एक बार इरा ने इकबाल को बताया कि उसकी मां बहुत बीमार है और उसे भोपाल जाना होगा। इरा ने बताया कि भोपाल में उसकी मां ज्वॉय पेटर्सन ने नवाब हमीदुल्ला खां के बंगले को खरीदा है और वो वहीं रहती हैं। वह बंगला बहुत कीमती था। इकबाल ने उसके बारे में पहले से ही सुन रखा था। इस बंगले को हथियाने के लिये इकबाल ने चाल चलनी शुरू कर दी। भोपाल के श्यामला हिल्स में मुख्यमंत्री निवास से चंद कदमों की दूरी पर करीब 8343 वर्ग फुट में बना ये बंगला ‘अंग्रेजन के बंगले’ के नाम से मशहूर था। इकबाल ने इरा को आर्थिक मदद देने के बहाने से बंगले के कागजात हथिया लिये। बाद में उसने धीरे-धीरे किनारा करना शुरू। कुछ ही दिनों में इरा की मां की मौत हो गई। तब तक इकबाल बंगले को अपने नाम करवा चुका था। इरा अपने कुछ दोस्तों की मदद से भारत छोड़ कर विदेश चली गई। इकबाल ने जिस प्रॉपर्टी को हासिल करने के लिए इरा को धोखा दिया, वहां उसके जाने के बाद एक रात भी नहीं गुजार पाया। वह बंगला वीरान ही रहा। माना जाता है कि इकबाल ने बंगले को संवारने की कोशिश की थी, पर ज्वॉय पेटर्सन की ‘आत्मा’ ने ऐसा नहीं करने दिया। कहते हैं कि ‘अंग्रेजन बंगले’ में आज भी ज्वॉय पेटर्सन की आत्मा रहती है। २५ नवम्बर १९९९ को संगीतकार गुलशन कुमार के हत्यारे अब्दुला उर्फ अनिल शर्मा का शव इस बंगले में मिला था। इस उजाड़ बंगले की कीमत लगभग दस करोड़ रुपए बताई जाती है। उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर फरार अपराधियों की सम्पत्तियों की कुर्की की प्रक्रिया के तहत इकबाल मिर्ची की इस सम्पत्ति की नीलामी का २४ बार प्रयास किया गया लेकिन किसी ने इसे नहीं खरीदा। अंतत: इसे वित्त मंत्रालय के सुपुर्द कर दिया गया।

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