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यंग क्लाइमेट चैंपियंस के साथ क्लाइमेट एक्शन पर दो दिन की वर्कशॉप शुरू

यंग क्लाइमेट चैंपियंस के साथ क्लाइमेट एक्शन पर दो दिन की वर्कशॉप शुरू

मुम्बई

स्किल बिल्डिंग वर्कशॉप का फोकस ऐसी ऑनलाइन कैंपेन डिजाइन करने पर होगा, जो भारत के लिए वर्ष 2050 तक कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कदम उठाने की पैरवी करें

मुंबई, 1 फरवरी, 2020: यूथ की आवाज नामक संगठन की ओर से 1 और 2 फरवरी 2020 को बॉम्बे सेंट्रेल के वाईएमसीए में क्लाइमेट एक्शन पर दो दिवसीय आवासीय वर्कशॉप का आयोजन किया जाएगा। यहां युवाओं को सोशल मीडिया की ताकतवर स्किल्स सिखाई जाएगी, जिसका प्रयोग वह डिजिटल कैंपेन को तैयार करने में कर सकते हैं। इन डिजिटल कैंपेन से यह युवा फैसला लेने में सक्षम अधिकारियों से मांग करेंगे कि भारत विभिन्न क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन को शून्य तक ले जाने में प्रमुख कदम उठाए।
आने वाले महीनों में बेस्ट कैंपेन के रूप में उभरने वाले कुछ अभियानों की 50,000 रुपये की फैलोशिप से मदद की जाएगी, ताकि वह ज्यादा से ज्यादा समय तक कैंपेन चला सकें और अधिक से अधिक लोगों को अपनी मांग के सपोर्ट में एकजुट कर सकें।
अभीर भल्ला (18 वर्ष, नई दिल्ली), पूजा जैन, 26, मुंबई, लिली पॉल (24 साल, नई दिल्ली), चैतन्य प्रभु (21वर्ष, मुंबई), साहित्य पालांगदा पूनाचा (23, बेंगलुरु) और रिजवान पाशा (27 वर्ष, चेन्नई) इस वर्कशॉप में हिस्सा लेने वाले कुछ प्रतिभागी हैं। वह कई वर्षों से व्यक्तिगत क्षमता से क्लाइमेट एक्शन और स्थिरता की दिशा में काम कर रहे हैं।
1 और 2 फरवरी 2020 को क्लाइमेट चेंज के समर्थन में अभियान चलाने वाले युवा कैंपेनर को वह स्टेप्स सिखाए जाएंगे किस तरह वह अपनी समस्या को अच्छी तरह पारिभाषित करते हुए ऑनलाइन कैंपेन बना सकते हैं? किस तरह अपनी मांगों को निर्णय करने वालों के सामने पेश कर सकते हैं? उनको लोगों को प्रभावी ढंग से पहुंचने की रणनीति सिखाई जाएगी। किस तरह वह अपनी आवाज को उठाने के लिए सोशल मीडिया का प्रभावी इस्तेमाल कर सकते है? किस तरह वह सरकार में विभिन्न स्तरों पर, निर्वाचित प्रतिनिधियों से लेकर ब्यूरोक्रेट्स, तक फैसला लेने वाले में सक्षम अधिकारियों और मीडिया को प्रभावित कर सकते हैं?

यूथ की आवाज के संस्थापक और एडिटर इन चीफ अंशुल तिवारी ने कहा, “किसी भी समय से आज यह ज्यादा जरूरी हो गया है कि हम जलवायु परिवर्तन पर लगाम लगाने को गंभीरता से लें और देश में फैसला लेने में सक्षम लोगों से इसी तरह की डिमांड करें। दुनियाभर में नौजवान और युवा वर्ग जलवायु परिवर्तन पर रोक लगाने के लिए कदम उठाने की मांग के लिए आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं। भारत में भी लाखों बच्चे अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। यह सरकारों के लिए युवाओं की आवाज को नजरअंदाज करना बंद करने और क्लाइमेट चेंज के खिलाफ कदम उठाने का समय है। इस कार्यक्रम और इस परियोजना से हम उसी दिशा में कदम उठाने की कोशिश कर रहे हैं।“
अमेरिका और चीन जैसे विकसित देशों के बाद ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन के मामले में भारत को तीसरे बड़े देश का दर्जा हासिल है। जीवाश्म ईंधन को जलाने की बढ़ती हुई दर माहौल में कार्बन डाई आक्साइड और अन्य खतरनाक गैसों की मात्रा बढ़ा रही है, जिससे ओजोन परत को लगातार नुकसान पहुंच रहा है। इससे धरती का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है।
अगर इसकी रोशनी में देखा जाए भारत के पास ऊर्जा, यातायात, कृषि और इंडस्ट्रीज जैसे विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले कार्बन उत्सर्जन को रोकने के लिए स्थिर और स्पष्ट रणनीति का अब तक अभाव है। भारत अभी तक इन क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन से मुक्ति की कोई रणनीति नही बना पाया है।
एक्शन नेटवर्क वर्कशॉप में फोकस 18 से 30 वर्ष के उन यंग कैंपेनर्स की खोज पर रहेगा, जो इन सब चिंताओं को कैपेन के माध्यम से दिखाने के इच्छुक हैं। यह वर्कशाप भारत में बढ़ते हुए कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए व्यवस्थागत बदलाव लाने की दिशा में काम करेगी। जब भारत नवंबर 2020 तक जलवायु परिवर्तन पर दीर्घकालिक नीति के प्रारूप को अंतिम रूप देने की तैयारी कर रहा है। ऐसे समय में एक्शन नेटवर्क वर्कशॉप का उद्देश्य फैसला लेने में सक्षम लोगों को प्रभावित कर उन पर दबाव डालने का है कि वह महत्वपूर्ण क्षेत्रों से कार्बन उत्सर्जन की कटौती करने के तरीकों पर अपना ध्यान ज्यादा से ज्यादा केंद्रित करें।
मुंबई वर्कशॉप के लिए एक्शन नेटवर्क फैलोज को देश के विभिन्न भागों से नियुक्त किया गया। इन एक्शन फैलोज की भर्ती का आधार देश में विभिन्न क्षेत्रों से कार्बन उत्सर्जन में कटौती में उनकी दिलचस्पी और जलवायु परिवर्तन की रोकथाम के उपाय के प्रति उनका झुकाव था।

कुछ चुने हुए कैंपेनर्स में शामिल हैं:

अभीर भल्ला, 18, नई दिल्ली : अभीर की विशेषज्ञता का क्षेत्र वायु प्रदूषण और अपशिष्ट प्रबंधन (वेस्ट मैनेजमेंट) है। उनका फ्लैगशिप प्रोजेक्ट स्वच्छ चेतना था, जो उन्होंने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के सहयोग से स्थापित किया था। उन्होंने इस परियोजना में अपने स्कूल के बच्चों को ही शामिल नहीं किया, बल्कि एनजीओ और सरकारी स्कूलों को भी इस कैंपेन में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। इस कैंपेन में स्वच्छता, जागरूकता और दिल्ली-एनसीआर में पौधारोपण अभियान शामिल है। अभीर ने हाल ही में स्कूल की पढ़ाई पूरी की है। अब वह अशोका यूनिवर्सिटी के फर्स्ट ईयर स्टूडेंट हैं।

पूजा जैन, 26, मुंबई : “ट्रेजर फ्रॉम ट्रैश” सोर्स से होने वाले वेस्ट मैनेजमेंट के प्रति जनजागरूकता फैलाने की पहल है, जिसमें नागरिकों को उनकी सामाजिक, नैतिक और कानूनी जिम्मेदारियों का अहसास कराया जाता है। उनकी कैंपेन गणपति उत्सव जैसे त्योहारों के दौरान एकत्र होने वाले कूड़ा-करकट से ही निकली है। इस कैंपेन का लक्ष्य उनकी ओर से की गई कारर्वाई का दूसरे लोगों की जिंदगी और माहौल पर असर दिखाना होगा। इस कैंपेन में दूसरे लोगों को अपनी इच्छा से सभी लोगों के बेहतर भविष्य के लिए कार्य करने करने की दिशा में प्रेरित किया जाएगा। उन्हें आसान तरीकों से अपनी आदतों में बदलाव की ट्रेनिंग दी जाएगी। इस अभियान की पॉलिसी के तहत गणपति पंडाल के मालिकों से एक फॉर्म अनिवार्य रूप से भराया जाएगा कि वह पंडाल में गणपति की मूर्तियों को इको फ्रेंडली ढंग से विसर्जित करने की वैकल्पिक व्यवस्था करेंगे और वह प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी गणपति की मूर्तियों का प्रयोग नहीं करेंगे।

लिली पॉल, 24, नई दिल्ली : उनकी कैंपेन प्रदूषण और फसलों के अवशेष या पराली जलाने से माहौल में फैलने वाले हानिकारक धुएं पर रोक लगाने पर केंद्रित है। वह अपनी कैंपेन में उन किसानों के लिए पराली की समस्या से निजात पाने के लिए कई समाधान पेश करेंगी, जो फसलों के अवशेष जलाने से वातावरण को होने वाले नुकसान के कारण इस वाद-विवाद के केंद्र में है। यह कैंपेन इस तथ्य के आधार पर सामाजिक जागरूकता बढ़ाएगी कि सर्दियों में पराली जलाने के अलावा किसी अन्य उपाय से इससे निजात पाने का खर्च किसान बर्दाश्त नहीं कर सकते इसलिए उन्हें पराली जलाने के लिए उकसाने का काम बंद होना चाहिए। इसकी जगह सरकार को किसानों को पराली की समस्या से निपटने के लिए उपकरण खरीदने के लिए सब्सिडी देनी ही चाहिए।

चैतन्य प्रभु, 21, मुंबई : वह मुंबई में कूड़े-कचरे को अलग-अलग करने की परियोजना पर काम कर रहे हैं। उनके प्रोजेक्ट में कचरे को अलग-अलग करने के महत्व पर लोगों को शिक्षित करना शामिल है। हर घऱ और संस्था के लिए इस कूड़े-कचरे को अलग-अलग करने का महत्व की अहमियत समझना महत्वपूर्ण कैसे हैं। वह कूड़े-कचरे से कच्चा तेल निकलाने की दिशा में भी एक कैंपेन चला रहे हैं।

साहित्या पलांगदा पूनाचा (23) बेंगलुरु : उनके कैंपेन आइडिया मे कोडागु में जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने कें लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाना है। उन्होंने इस कैंपेन के तहत कारर्वाई के कई बिंदु रखे थे, जिसमें वनों की कटाई, अनियिमित निर्माण, मानव और वन्य जीवों का संघर्ष, रेत का अवैध खनन, आपदा की रोकथाम औरक रिकवरी आदि शामिल हैं। ये प्लेटफॉर्म कार्यकर्ताओं, नीति निर्माताओं और नागरिकों को एक ही छत के नीचे लाएगा, जिससे वह आपस में चर्चा कर सकेंगे,डिबेट कर सकेंगे और साथ मिलकर काम कर सकेंगे। इस प्लेटफॉर्म के अभाव में वह अकेले ही काम करते।

रिजवान पाशा, 27, मुंबई उनके कैंपेन का लक्ष्य चेन्नई को राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम में शामिल करना है, जिसमें पूरे शहर की हवा पर नजर रखने को लिए में निगरानी स्टेशनों की संख्या बढ़ाई जाएगी और आगामी 5 वर्षों में इस पर कारर्वाई की जाएगी। उन्हें कैंपेन के माध्यम से पर्यावरण मंत्रालय, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष और तमिलनाडु प्रदूषण प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के सामने अपनी मांगों को रखना होगा।

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