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धुलिया जिले के शिरूड से उठे श्री माऊली मल्टिस्टेट क्रेडिट को- ऑप सोसाईटी की ठगी की व्याप्ति नासिक तक बढी ,घोटाले की रकम 25 करोड तक पहुँची।  

धुलिया जिले के शिरूड से उठे श्री माऊली मल्टिस्टेट क्रेडिट को- ऑप सोसाईटी की ठगी की व्याप्ति नासिक तक बढी ,घोटाले की रकम 25 करोड तक पहुँची।

गोपाल मारवाडी

धुलिया _ माऊली मल्टिस्टेट क्रेडिट कोऑप सोसाईटी के प्रमुख संचालक विष्णु रामचंद्र भागवत के एक अन्य उज्ज्वलम् अॅग्रो मल्टिस्टेट को-ऑप सोसाईटी में भी करोड़ों रुपए का गबन करने की घटना उजागर हुई हैं। जिसमें लगभग 2000 निवेशकों के साथ 25 करोड़ रूपये की आर्थिक धोखाधड़ी का आँकड़ा जाँच कार्य में सामने आ रहा हैं।

आरोपी विष्णु भागवत के साथ लगभग 15 व्यक्तियों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज करके नासिक पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने सात व्यक्तियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे डाल दिया हैं। कई महिलाएँ भी इन ठगबाजों की आर्थिक धोखाधड़ी का शिकार हुई हैं ।अधिकृत सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार विष्णु रामचंद्र भागवत निवासी यवंडगांव, तहसील येवला,जिला नासिक द्वारा अक्टूबर 2015 से जनवरी 2019 के बीच उज्ज्वलम् अॅग्रो मल्टिस्टेट क्रेडिट कोआॅप सोसाईटी एवं श्री माऊली मल्टिस्टेट क्रेडिट कोऑप सोसाईटी के नाम से नासिक एवं धुलिया में कार्यालय खोलकर, शिरूड एवं नासिक में तथाकथित अधिकारी एवं कर्मचारियों की नियुक्ति कर, जोरशोर से उक्त शाखाओं का उद् घाटन भी करवाया।

साथ ही आकर्षक ब्याज दरों के साथ ही सोना चाँदी की भेंट वस्तुएँ और दर्शनीय स्थलों के सैरसपाटे का प्रलोभन (लालच) दिखाकर धुलिया एवं नासिक जिले के हजारों निवेशकों से करोड़ों रुपए निवेश करवाये। शिरूड शाखा में 10 करोड़ ,29 लाख 41956 रूपयों का एवं नासिक शाखा में 5 करोड़ 28 लाख 34308 रूपयों का सिर्फ माऊली मल्टिस्टेट क्रेडिट कोआॅप सोसाईटी में ही गबन किया ।

इस संबंध में धुलिया तहसील पुलिस थाने में दर्ज शिकायत पर आर्थिक अपराध शाखा ने भादंवि की विभिन्न धाराओं 406,409, 420,120 (ब), 464, 467 के तहत एवं निवेशक खातेदार हितसंरक्षण अधिनियम 1999 की धारा 3,4,5 के अंतर्गत और प्राईज चिट एंड मनी सर्क्युलेशन (बैकिंग) अधिनियम 1978 की धारा 4,5,6 के तहत गुनाह दर्ज करके, आर्थिक अपराध शाखा के सहायक पुलिस निरीक्षक श्री हेमंत बेंडाळे को जाँच कार्य सौंपा गया हैं। संपूर्ण धुलिया, नासिक जिले को ही नहीं बल्कि उत्तर महाराष्ट्र को हिलाकर रख देनेवाले इस आर्थिक धोखाधड़ी के तथाकथित मास्टर माइंड विष्णु रामचंद्र भागवत ने अन्य संचालक साथियों के साथ मिलीभगत कर रेंज रोव्हर,टोयोटा फाॅर्च्यून जैसी महँगी गाड़ियों को खरीदा। निवेशकों की गाढ़ी मेहनत की कमाई को अपनी ऐय्याशी विलासिता में अवैध रूप से खर्च कर दिया।उज्ज्वलम् अॅग्रो मल्टिस्टेट क्रेडिट कोआॅप सोसाईटी में निवेश किये करोड़ों रुपयों को बिना कृषी मंत्रालय,कृषी भवन,नई दिल्ली की अनुमति लिये अवैध रूप से माऊली मल्टिस्टेट क्रेडिट कोआॅप सोसाईटी में ट्रांसफर कर दिये।

जब दोनों ही कोऑप सोसाईटी के निवेशकों को नियत कालावधी के बीत जाने के बाद भी अपनी डिपाॅजिट की रकम वापस देने में स्थानीय अधिकारी ,कर्मचारीगण आनाकानी करने लगे तब निवेशकों के मन में शंका उत्पन्न हुई। लेकिन नासिक के निवासी एवं निवेशक संदीप भीमराव पाटील की शिकायत पर आर्थिक अपराध शाखा नासिक द्वारा विष्णु रामचंद्र भागवत समेत आठ व्यक्तियों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज की गयी हैं ।

इस संबंध में नासिक पुलिस ने 1)कृष्णा भुजंगराव वारे,निवासी आनंदनगर,तहसील पाथर्डी, जिला अ.नगर 2)मयूर सुनील पवार,निवासी पारेगांव रोड,तहसिल येवला,जिला नासिक 3)प्रकाश अप्पासाहेब नन्नावरे निवासी सोलापूर 4)धनंजय भिमराव सावंत निवासी सोलापूर 5)दादा महादेव माने निवासी बारामती जिला पुणे 6)नानासाहेब अशोक पायधन निवासी तळेगांव तहसील हवेली जिला पुणे 7)रोहिदास शांताराम हजारे निवासी तळेगांव तहसील हवेली जिला पुणे इनको गिरफ्तार किया हैं।साथ ही 4 करोड़ 8 लाख 6609 रूपये कीमत के चार पहिया वाहन जब्त किये हैं ।

आर्थिक अपराध शाखा नासिक ने तत्परता से विष्णु रामचंद्र भागवत के संबंधित सोसाईटी के एवं अन्य कुल 27 बैंक खाते सील (फ्रीज) कर दिये हैं।इन खातों में नाममात्र 10 लाख रूपये की रकम ही शिलक बची मिली हैं।सभी नामजद आरोपियों की संपूर्ण चल-अचल संपत्तियों की जानकारियाँ हासिल की जा रही हैं ताकि उन्हें निवेशक खातेदार संरक्षण अधिनियम 1999 की धारा 4 के तहत संलग्न (अटैच) किया जा सके।

इस धोखाधड़ी की जाँच पुलिस आयुक्त श्री विश्वास नागरे पाटील, विशेष अपराध शाखा पुलिस उपायुक्त श्री लक्ष्मीकांत पाटील के मार्गदर्शन में आर्थिक अपराध शाखा के सहायक पुलिस आयुक्त श्री समीर शेख कर रहे हैं । प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की स्थापना कर उसके माध्यम से करोड़ों रुपयों की आर्थिक धोखाधड़ी लूट को अंजाम देने में बड़ी राजनीतिक हस्तियों के आशीर्वाद के बिना संभव नहीं दिखाई देता है ऐसा धोखाधड़ी के शिकार खातदारों का कहना हैं इसलिए इस कांड की जाँच ईडी के तहत करने की मांग जोर पकड़ रही हैं ।

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