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मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने दान करने वाले एक गिरोह का किया भंडाफोड़ फ़र्ज़ी आरबीआई अधिकारी सहित दो गिरफ्तार तो भोजपुरी अभिनेता फरार

मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने दान करने वाले एक गिरोह का किया भंडाफोड़ फ़र्ज़ी आरबीआई अधिकारी सहित दो गिरफ्तार तो भोजपुरी अभिनेता फरार

> व्यापारी सहित राजनेताओं से कर चुके थे करोड़ों की ठगी

 


मुंबई – इंद्रदेव पांडे

आपको जितने का लोन चाहिए, क्या कोई उससे डबल रकम दान में दे सकता है. ठगों का एक गिरोह यह दान दे रहा था, पर दान नोटों में नही, कागज के टुकड़ों में था. मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने ऐसा दान करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। खास बात यह है कि इन ठगों ने हरियाणा के दो विधायकों और यूपी के एक बड़े राजनेता को भी अपने ट्रैप में लिया और उनसे करोड़ों रुपये की ठगी की, लेकिन किसी ने भी पुलिस में शिकायत नहीं की। ठगों का मुख्य सरगना गायत्री प्रसाद शुक्ला है, जो एक फाइनेंस कंपनी में मैनेजर है। उसके साथ आनंद कुमार तिवारी और सुजीत यादव नामक आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है। इस केस में भोजपुरी का एक बड़ा अभिनेता वॉन्टेड है।

मुंबई पुलिस की अपराध शाखा के एक अधिकारी के अनुसार, मुंबई के एक बड़े बिजनेसमैन ने कुछ दिनों पहले गायत्री से कई करोड़ के लोन के लिए संपर्क किया. गायत्री ने जवाब में उस व्यापारी से कहा कि उसे जितना लोन चाहिए, उसे मिलने में काफी वक्त लगेगा। लेकिन यदि उसे तुरंत रकम चाहिए, तो आरबीआई के एक अधिकारी को वह जानता है, जिसके पास एक ही सीरिज के दो हजार के करोड़ों नोट जमा हैं. वह इन्हें निकालना चाहता है. बदले में वह मूल रकम की डबल रकम दे रहा है. इसमें तुम्हारा डबल फायदा हो जाएगा और तुम्हें लोन भी नहीं लेना पड़ेगा. आरबीआई अधिकारी की इस बहाने नौकरी भी बच जाएगी.

इसलिए खतरे में थी नौकरी

आरबीआई अधिकारी की नौकरी क्यों खतरे में है. यह कहानी भी उसने विस्तार से समझाई. गायत्री के अनुसार, तीन साल पहले जब देश में नोटबंदी हुई थी, तब केंद्र सरकार ने सबसे पहले दो हजार रुपये के नोट छापने का फैसला किया था. यह जिम्मा संबंधित आरबीआई अधिकारी पर था. देश भर में लाइनें लगी हुई थीं.सरकार पर बहुत दबाव था. सरकार इस आरबीआई अधिकारी पर जल्द से जल्द नोट छापने का दबाव डाल रही थी। इस वजह से हड़बड़ी में एक ही सीरिज के डबल, ट्रिपल नोट छप गए। जब तक यह गलती पकड़ी गई, तब तक करोड़ों रुपयों जमा हो गए थे। इस आरबीआई अधिकारी ने फिर इन नोटों को अपने घर में जमा किया। बाद में उसे लगा कि कभी उसके घर सीबीआई या इनकम टैक्स की रेड पड़ सकती है। यदि नोट आरबीआई गोदाम में रखे, तो वहां कोई भी एक ही सीरिज के कई बंडलों को पकड़ सकता है। फिर इस आरबीआई अधिकारी को जितने सरकार ने नोट छापने का आदेश दिया था, उसका हिसाब भी सरकार को देना है। इसलिए यह आरबीआई अधिकारी दो हजार के नोटों में मूल रकम लेकर दो हजार के नोटों में ही डबल रकम दे रहा है। बस, उसकी एक ही शर्त है कि मूल रकम ५० लाख रुपये से कम नहीं होनी चाहिए।

पांच सितारा होटल में हुई मुलाकात

मुंबई के इस व्यापारी को यह आइडिया जम गया। उसने फाइनेंस कंपनी में मैनेजर गायत्री प्रसाद शुक्ला से कहा कि उसके पास फिलहाल ८०-८५ लाख रकम दो हजार के नोटों में होगी। इस पर गायत्री ने कहा कि आप एक फाइव स्टोर में कमरा बुक करा दो। मैं वहां आरबीआई अधिकारी को बुला लेता हूं। उनके साथ उनका स्टाफ भी होगा। कुछ दिन पहले मुंबई का व्यापारी ८० लाख रुपये लेकर गोरेगांव के एक पांच सितारा होटल में पहुंचा। गायत्री इस फर्जी आरबीआई अधिकारी व उनके स्टाफ को लेकर उस होटल पहुंचा। स्टाफ ने व्यापारी के पूरे नोट गिने। बदले में यह फर्जी आरबीआई अधिकारी जब अपने नोट गिना रहा था, तभी उनके कमरे में एक बंदा आया। बोला, एटीएस ने हमारे एक आदमी को नीचे पकड़ लिया है। आरबीआई अधिकारी बोला, तब तो हम सब लोग भी पकड़े जाएंगे।

गायत्री और आरबीआई अधिकारी ने मुंबई के व्यापारी से नोट लिए । उसने कहा कि लाओ हम इसे एक अखबार में पैक कर देते हैं, ताकि एटीएस वालों को नोट खुले में न दिखें। इन ८० लाख को पैक करने के बाद फर्जी आरबीआई अधिकारी ने बहुत चतुराई से वह पैकेट अपने बैग में रख लिया और अपने बैग में पहले से पैक अखबार का दूसरा पैकेट व्यापारी के बैग में रख दिया। इसके बाद दोनों अलग-अलग रास्तों से होटल से निकल गए। घर पहुंचने के बाद जब व्यापारी ने अखबार का पैकेट खोला, तो उसमें उसे मूल नोट नहीं, कागज के टुकड़े मिले। इसके बाद जब मुंबई पुलिस के अपराध शाखा के चीफ संतोष रस्तोगी तक शिकायत पहुंची, तो उन्होंने सीनियर इंस्पेक्टर संजय निकुंबे, गणेश केकण, हृदय मिश्रा, आरिफ पटेल, राजेश सोनावणे और प्रकाश पास्ते की एक विशेष टीम बनाई। कई दिन की मेहनत के बाद रविवार को तीन आरोपी गिरफ्त में आए। आरोपियों ने बताया कि उन्होंने अपनी इस मोडस ऑपरेंडी से कई बड़े राजनेताओं को भी ठगा है, पर किसी ने पुलिस में शिकायत नहीं की।

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