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इतिहास के झरोखे में, देश की राजधानी दिल्ली की जामा मस्जिद

इतिहास के झरोखे में, देश की राजधानी दिल्ली की जामा मस्जिद


(संवाददाता लियाकत शाह)

देश की राजधानी दिल्ली में शुक्रवार देर शाम अजान के बाद चांद देखा गया, जिसके बाद माह-ए-रमजान के पवित्र महीने की घोषणा की गई वहीं इसके बाद तारावाही की नमाज की पंरपरा शुरू की गई, लेकिन इस बार तारावही की नमाज मस्जिदों में ना पढ़ते हुए घरों से ही अता करने को कहा गया है। कोरोना वायरस से बचाव के लिए घोषित बंदी के बीच रोजेदारों ने शनिवार को पहला रोजा रखा। इस बीच दिल्ली की जामा मस्जिद की एक तस्वीर खूब वायरल हो रही है। रमजान शुरू होते ही राजधानी दिल्ली की जामा मस्जिद की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। दरअसल, ड्रोन कैमरे से ली गई इस शानदार तस्वीर में ऐतिहासिक जामा मस्जिद एक दम खामोश दिखाई दे रही है, अगर कोई और वक्त होता तो यह तस्वीर देखकर कले’जा मुं’ह को आ जाता, लेकिन रमजान के महीने में भी जामा मस्जिद की यह तस्वीर सुकून दे रही है।

वजह साफ है कि दुनिया भर में एक न दिखाई देने वाला जा’नले’वा कोरोना वायरस फेल रहा है। जिसको लेकर देश भर में जारी लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग नियमों का पालन करते हुए मस्जिदों के दरवाजें बंद कर दिए गए हैं, और मुगलकालीन स्थापत्य कला का शाहकार जामा मस्जिद की यह तस्वीर भा रही है। इतिहास के पन्ने पलटें तो कुछ यूं पता चलता है कि सदियों बाद ऐसा मौका आया है जब जामा मस्जिद में एक भी नमाजी नजर नहीं आ रहा है। १८५७ के स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत के बाद यह पहला मौका है जब माह-ए-रमजान में जामा मस्जिद सूनी है। आपको बता दें १८५७ में ब्रिटेन की ईस्ट इंडिया कंपनी को सिपाही विद्रोह का सामना करना पड़ा था इतिहासकार इसी विद्रोह को स्वतंत्रता आंदोलन का आगाज मानते हैं, जिसने देश भर में बड़ा रूप लिया और आखिरकार १९४७ में अंग्रेजों को भारत छोड़ना पड़ा। इसी साल यानी १८५७ में ही मुगल शासन का अंत भी माना जाता है। जब अंग्रेजों ने आखिर मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर को कैद कर रंगून भेज दिया और उनके बेटों को फां’सी दे दी थी। आपको बता दें जामा मस्जिद का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने १६५० में शुरु कराया था। करीब ६ साल की मेहनत के बाद १६५६ में मस्जिद बनकर तैयार हुई। यह जामा मस्जिद लाल पत्थर और संगमरमर से बनी हुई है और लाल किले से इसकी दूरी मात्र ५०० मीटर है। मस्जिद का सहन और इबादतगाह बहुत खूबसूरत है और इसमें ग्यारह मेहराबें हैं। बीच का मेहराब सबसे बड़ा है। वही मस्जिद की ऊपरी गुंबदों को सफेद और काले संगमरमर से सजाया गया है।

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