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कॉंग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए, सीतारमण ने आरबीआई के पूर्व गवर्नर “रघुराम राजन के शब्दों” को भी याद करते हुए कॉंग्रेस शासन के बारे में राहुल गांधी को याद दिलाया।

68607 करोड़ कर्ज डिफाल्टर्स मामला

कांग्रेस लोगों को गुमराह करती है : निर्मला सीतारमण

आरबीआई न तो किसी को कर्ज देती हैं न उसे बट्टे खाते में डालती हैं : आरबीआई

विक्रम सेन
नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और रणदीप सिंह सुरजेवाला ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया था कि सरकार ने बैंक डिफॉल्टरों का कर्ज माफ कर दिया है। राहुल ने कहा था कि *”अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने नीरव मोदी, मेहुल चोकसी सहित भाजपा के मित्रों के नाम बैंक चोरों की लिस्ट में डाल दिए हैं।”*
कॉंग्रेस नेताओं के हमले का वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जवाब दिया है। उन्होंने *”कांग्रेस पर देश की जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है।”*

साथ ही आरबीआई ने भी विलफुल डिफाल्टर्स के संबंध में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कँहा हैं कि *”रिजर्व बैंक न किसी को कर्जा देती हैं, न किसी का कर्जा माफ करती हैं।”*

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन दोनों कांग्रेस नेताओं के मंगलवार के 5 करोड़ से ऊपर के कर्ज वालो की कर्ज माफी के आरोपों पर देर शाम श्रृंखलाबद्ध ट्वीट करते हुए ख़ुलासे के साथ जवाब दिया, *”राहुल गांधी और कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने लोगों को भ्रामक तरीके से गुमराह करने का प्रयास किया है। कांग्रेस के लोग संदर्भ से बाहर निकालकर सनसनीखेज तथ्यों का सहारा लेते हैं। हमने किसी का कर्जा माफ नही किया हैं।”

ट्वीट्स की इस श्रृंखला में, सीतारमण ने उठाए गए मुद्दों पर सिलसिलेवार प्रतिक्रिया दी

कांग्रेस के नेताओं की कोशिश विलफुल डिफॉल्टर्स, बैड लोन और राइट-ऑफ पर गुमराह करने की है। 2009-10 और 2013-14 के बीच, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों में 1,45,226.00 करोड़ रुपये बट्टा खाते (राइट ऑफ) में डालें गए। उन्होने चुटकी लेते हुए कहा है कि बैंक डिफॉल्ट और लोन माफी के मामले पर काश राहुल गांधी मनमोहन सिंह से सलाह ले लेते कि राइट ऑफ (बट्टा खाते में डालना) क्या होता है।”

कॉंग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए, सीतारमण ने आरबीआई के पूर्व गवर्नर “रघुराम राजन के शब्दों” को भी याद करते हुए कॉंग्रेस शासन के बारे में राहुल गांधी को याद दिलाया।

*”2006-2008 की अवधि में बड़ी संख्या में बुरे ऋणों की उत्पत्ति हुई, बहुत सारे ऋण अच्छी तरह से जुड़े प्रवर्तकों के लिए किए गए थे, जिनके ऋणों में चूक का इतिहास रहा है, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकरों ने निजी क्षेत्र के बैंकों के होते हुए भी प्रमोटरों को वित्तपोषण जारी रखा। यद्धपि आरबीआई ऋण देने की गुणवत्ता के बारे में अधिक क़दम उठा सकता था।”*
सीतारमण ने वित्त मंत्री ने नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और विजय माल्या के मामलों का विवरण देते हुए ख़ुलासा किया कि

*”नीरव मोदी मामला: 2,387 करोड़ रुपये से अधिक की अचल और चल संपत्ति जुड़ी / जब्त की गई। (अटैचमेंट 1,898 करोड़ रुपये और जब्ती 489.75 करोड़ रुपये)। इसमें 955.47 करोड़ रुपये की विदेशी अटैचमेंट भी शामिल हैं। 53.45 करोड़ रुपये की लक्जरी वस्तुओं की नीलामी की गई हैं नीरव मोदी अभी ब्रिटेन की जेल में है।”

मेहुल चोकसी मामले में, सीतारमण ने कहा कि *”67.9 करोड़ रुपये के विदेशी लगाव सहित 1,936.95 करोड़ रुपये के अटैचमेंट किए गए हैं और 597.75 करोड़ रुपये की जब्ती हुई है।”*
*” उसके खिलाफ रेड नोटिस जारी किया गया। एंटीगुआ को इस हेतु प्रत्यर्पण का अनुरोध भेजा गया है। साथ ही मेहुल चोकसी को भगोड़ा अपराधी घोषित करने की सुनवाई जारी है।”

अपने ट्वीट में विजय माल्या के मामले में सीतारमण ने कहा, *”कुर्की के समय कुल मूल्य 8,040 करोड़ रुपये था और जब्ती का मूल्य 1,693 करोड़ रुपये था। जब्ती के समय शेयरों का मूल्य 1,693 करोड़ रुपये था। इसे भगोड़ा अपराधी घोषित किया हैं, भारत द्वारा प्रत्यर्पण अनुरोध पर यूके उच्च न्यायालय द्वारा, प्रत्यर्पण के लिए भी फैसला सुनाया है।”*

निर्मला सीतारमण ने कहा कि *”यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार है जो इन विलफुल डिफॉल्टरों का पीछा कर रही है।”*

उन्होंने कहा, *”भगोड़ा संशोधन अधिनियम को लागू किया गया हैं। वही अब तक नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और विजय माल्या के मामलों में कुर्की और जब्ती का कुल मूल्य 18,332.7 करोड़ रुपये है।”*
“।

वित्त मंत्री ने कहा कि *”कांग्रेस और राहुल गांधी को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए कि वे व्यवस्था को साफ करने में रचनात्मक भूमिका निभाने में विफल क्यों हैं।”*
सीतारमण ने आगे कहा, *”न तो सत्ता में रहते हुए, न ही विपक्ष में रहते हुए, कांग्रेस ने भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कोई प्रतिबद्धता या झुकाव दिखाया है।”*

*विलफुल डिफाल्टर्स की राशी बट्टे खाते में जाने पर आरबीआई की प्रतिक्रिया*

आरबीआई ने कथित 68607 करोड़ रुपये के कर्ज को बट्टे खाते में डालने की बात से इनकार किया है। एक महत्वपूर्ण मीडिया संस्थान से साथ खास बातचीत में रिजर्व बैंक के प्रवक्ता ने यह जानकारी दी।
*आरटीआई को गलत तरीके से समझकर पेश किया जा रहा है*

रिजर्व बैंक की तरफ से बताया गया है कि *”राइट ऑफ बैंकों की तरफ से की जाने वाली एक अकाउंटिंग की प्रक्रिया होती है। जहां कर्ज को एक अलग बट्टे खाते में डाल दिया जाता है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं होता है कि कर्ज की वसूली ही बंद कर दी जाती है। जैसे ही बैंक कर्ज की वसूली कर लेते हैं वो उनके मुनाफे में दिखाई देता है।”*

आरटीआइ कार्यकर्ता साकेत गोखले द्वारा मांगी जानकारी में आरबीआइ ने जिन 50 विलफुल डिफॉल्टर्स के नाम पिछले दिनों बताए हैं, उनमें से अधिकतर के खिलाफ वसूली प्रक्रिया जारी है। दिलचस्प यह भी है कि विपक्ष की तरफ से लोन राइट ऑफ करने यानी बट्टा खाते में डालने को कर्ज माफ करने की तरह पेश किया गया है, बोलचाल की भाषा मे इसे कुछ भी कँहा जाए, जबकि कारोबार की भाषा में दोनों बिल्कुल अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।

*कर्ज माफी और राइट ऑफ में अंतर*

*कर्ज माफी*

कर्ज माफी वह प्रक्रिया है, जिसके तहत सरकार या बैंक कर्जदार की वित्तीय स्थिति का आकलन करने और यह सुनिश्चित करने के बाद कि कर्जदार ने मजबूरी में कर्ज नहीं चुकाया या नहीं चुका सकता, उसके कर्ज को माफ कर देते हैं। इसका मतलब यह है कि उसकी देनदारी खत्म मान ली जाती है, उससे वसूली प्रक्रिया रोक दी जाती है। कई बार बिल्कुल समय पर कर्ज चुकाने वालों द्वारा बहुत सी किस्तें चुका दिए जाने के बाद बैंक आभार के तौर पर उनकी कुछ किस्तें माफ कर देते हैं।

*राइट ऑफ या बट्टा खाता*

किसी कर्ज को बट्टा खाते में डालने का मतलब यह है कि बैंक को उस कर्ज का अब कुछ भी मूल्य मिलने की उम्मीद नहीं है और वसूली के लिए कानूनी प्रक्रिया की मदद लेनी पड़ेगी। इस प्रक्रिया में उसे अक्सर कुछ न कुछ रकम वापस मिल जाती है, जबकि कई मामलों में उसे पूरी रकम से हाथ धोना पड़ता है। बट्टा खाते में उन कर्ज को डाला जाता है जिनके चुकाने का साम‌र्थ्य तो कर्जदार में है, लेकिन वह नहीं चुकाने के तरह-तरह के बहाने बनाता और नहीं चुकाता है। विल्फुल डिफॉल्टर्स के कर्ज माफ नहीं किए जाते, बल्कि उन्हें बट्टा खाते में डाल वसूली प्रक्रिया जारी रखी जाती है।

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