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न शोहरत न कुछ माल व ज़र चाहिए मुझे बस तुम्हारी खबर चाहिए खुशनुमा हयात एडवोकेट

न शोहरत न कुछ माल व ज़र चाहिए
मुझे बस तुम्हारी खबर चाहिए

खुशनुमा हयात (एडवोकेट)

मुझे अपने दिल में तू दे दे जगह
मुझे भी तो अब कोई घर चाहिए

खुदा से फकत मांगती हूं उसे
दुआओं में मेरी असर चाहिए

अंधेरे में जीना नहीं है मुझे
मेरी ज़िन्दगी को सहर चाहिए

मुसाफिर हूं मंज़िल नहीं है मेरी
ठहरने को लेकिन डगर चाहिए

नहीं मोल जाहिल का ऐ खुशनुमा
यहां आदमी बा हुनर चाहिए

खुशनुमा हयात (एडवोकेट)
बुलंदशहर उत्तर प्रदेश

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