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क्यों करें मोदी सरकार पर भरोशा, 50 दिन बाद भी दाल दिल्ली से गाँव नहीं पहुंचा- माले

क्यों करें मोदी सरकार पर भरोशा, 50 दिन बाद भी दाल दिल्ली से गाँव नहीं पहुंचा- माले

समस्तीपुर जकी अहमद

पैकेज के नाम पर धोखा, प्रवासी मजदूरों की लगातार हो रही मौत, क्वरान्टाइन सेन्टर के नाम पर यातना गृह के खिलाफ 19 मई एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी विरोध कार्यक्रम के तहत लॉकडाउन के प्रावधानों का पालन करते हुए जिले में भाकपा माले के कार्यकर्ता अपने घरों – गांव – मुहल्लों – कार्यालयों में घरना देंगे. माले कार्यकर्ताओं द्वारा इसकी तैयारी की जा रही है.

उक्त आशय की जानकारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से देते हुए भाकपा माले जिला कमिटी सदस्य सुरेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा कि बगैर पूर्व तैयारी का लाकडाउन किये जाने से कोरोना से अधिक लोग भूख, बीमारी, सड़क हादसा आदि से मारे जा रहे हैं. सरकारी तैयारी कमजोर पड़ रही है. ऐसी स्थिति में मजदूर पैदल, साईकिल, बस, ट्रक, रेल पटरी आदि होकर अपने घर लौट रहे हैं तो सुरक्षा की व्यवस्था क्यों नहीं कर रही है. कोरोना प्रभावितों को पैकेज के नाम पर धोखा दिया जा रहा है. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि 50 दिनों बाद भी दिल्ली का दाल जिले में नहीं पहुंच पाया है.

माले नेता सुरेन्द्र ने कहा कि क्वारंटीन सेंटर को यातना गृह बनाकर रख दिया गया है. सेंटर पर मिलने वाली सुविधाओं को अधिकारी की मिलीभगत से दलाल- विचौलिया-जनप्रतिनिधि लूट रहे हैं. न चाय- नाश्ता- भोजन और न ही चिकित्सक समय पर सेंटर जाते हैं. यहाँ तक की पानी, पंखा की सुविधा आदि देने में कोताही बरती जा रही है.

माले नेता ने सड़क हादसे में मृतकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये मुआवजा देने, तमाम मजदूरों को 10 हजार रू० देने, मनरेगा में काम और मजदूरी 5 सौ रू० करने, गैर कार्डधारी को भी राशन और कार्ड देने, देश के विभिन्न हिस्से में बिहारी मजदूरों की सुरक्षा करने, तमाम मजदूरों को सुरक्षित वापस लाने की गारंटी करने की मांग सरकार से की है.

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