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प्रवासी मजदूरों का तैयार होगा डेटा और केंद्र-राज्य की योजनाओं में मिलेगा काम

प्रवासी मजदूरों का तैयार होगा डेटा और केंद्र-राज्य की योजनाओं में मिलेगा काम


(लियाकत शाह)
लॉकडाउन की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित प्रवासी मजदूर हुए हैं। हालांकि प्रवासी मजदूरों के लिए समस्याएं अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। वो अपने गृह राज्य तो लौट गए हैं लेकिन उनके सामने अब रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।

पीएम मोदी ने सभी प्रवासी मजदूरों की देखभाल के लिए केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत के नेतृत्व में जिओएम बनाई है। जिओएम ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर कहा है कि पिछले दो महीनों में लॉकडाउन के दौरान जो भी प्रवासी मजदूर, स्पेशल ट्रेन, पैदल या अन्य किसी साधन से घर पहुंचे हैं, उनका डेटा इकट्ठा किया जाए। निर्देश में बताया गया कि जिन मजदूरों का डेटा इकट्ठा होगा उसमें उनकी स्किल और उनके काम का अनुभव भी लिखा जाएगा। डाटा में बताया जाएगा कि संबंधित मजदूर ने किस तरह के काम किए हैं और उन्हें किस तरह के काम-काज में रुचि है।

राज्यों द्वारा प्रवासी मजदूरों का डेटा दिए जाने के बाद गांव, तहसील और जिले के पते के साथ वेबसाइट पर जानकारी अपलोड की जाएगी। श्रमिक मंत्रालय, प्रवासी मजदूरों का डेटा शेयर कर, केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों से इन प्रवासी मजदूरों को गरीब कल्याण योजनाओं में काम देने की भी अपील करेगा। जैसे मनरेगा के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत योजना, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना और राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण योजना।

स्किल मंत्रालय इन प्रवासी मजदूरों की ट्रेनिंग के लिए भी प्रोग्राम शुरू करेगी। श्रम मंत्रालय, निजी कंपनियो से भी पत्र लिखकर इन प्रवासी मजदूरों को काम देने की अपील करेगा। बता दें, महेंद्र नाथ पांडेय, प्रताप सारंगी, गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी भी जिओएम के सदस्य हैं।

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