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गरीबो के मसीहा कहलाये जाने वाले,मरहूम काज़ी आमिर , के लिए दुआ ए मग़फ़िरत की गई।

गरीबो के मसीहा कहलाये जाने वाले,मरहूम काज़ी आमिर , के लिए दुआ ए मग़फ़िरत की गई।


जलालाबाद,शामली( उत्तर प्रदेश ज़ीशान काज़मी)
हर दिल अज़ीज़,गरीबो के मसीहा कहलाये जाने वाले, काज़ी आमिर की दूसरी बरसी पर, दुवाएँ मग़फ़िरत,का एहतमाम किया गया ।

प्राप्त जानकारी के अनुसार उत्तराखंड ,जनपद हरिद्वार,मंगलोर की जानी मानी हस्ती,हर दिल अज़ीज़ ,गरीबो के मसीहा कहलाये जाने वाले काज़ी आमिर ( मरहूम) अपना अलग ही मकाम रखते थे।बताया जाता है कि वह मधुर भाषी, एकता भाईचारा,के प्रतीक शख़्सियत के मालिक थे।गुजिश्ता दो साल पहले अचानक तबियत खराब हुई, रमज़ान के 27वे रोज़े को इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गए।

काज़ी आमिर के दादा हाशमी के नाम से मशहूर थे,जो उस वक़्त के मजिस्ट्रेट भी हुवा करते थे।जमींदार घराने के बाबजूद शादी नही की सादगी के साथ,अपना जीवन समाज सेवा को समर्पित कर दिया,,समाजसेवा अपने दादा की इस विरासत को काज़ी आमिर ने आगे बढ़ाते हुए ,अपने फ़र्ज़ को बखूबी अंजाम देते रहे, लोगो के दिलो पर राज , और गरीबो,की दुवाएँ लेते रहे,उनकी शख़्सियत बाकमाल थी,

सियासी एतबार से भी अपना वजूद कायम रखा,सियासी फैसले लेने में माहिर थे,गरीबो की खिदमात ज़ोक शौक से करते थे।देश के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा आज़मी, उनकी फूफी लगती है।बडी सादगी के साथ,,मेहमान नवाजी में तो उनका अलग ही मकाम हासिल था।

लोक डाउन,,के चलते, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए काज़ी आमिर के भतीजे काज़ी ख़ालिद ने बताया कि चाचा की दूसरी बरसी पर घर मे ही रिसाले सवाब के लिए दुआ ए मग़फ़िरत की गई।

भतीजे काज़ी खालिद ने बताया कि लोक डाउन के चलते उनकी बरसी पर,मरहूम को खिराजे अक़ीदत के लिए फोन पर संदेश आ रहे है ।
काज़ी आमिर के भतीजे ,काज़ी खालिद ,अपने चाचा की विरासत को संभालकर, अपने फ़र्ज़ को बखूबी निभाह रहे है।

लोक डाउन के चलते ज़रूरत मंदो की खिदमात ,को टीम बना, कर , जिसमे चाचा के दोस्त, और मेरे दोस्त मिल कर, मुस्तहिक़ इमदाद परिवारों में खाने पीने के सामान की किट,, हर वर्ग समुदाय के पात्र परिवारों में तकसीम की जा रही है,, ।

इस बारे में काज़ी खालिद ने कहा,,, सब कुछ यही रह जाएगा,बस उसके साथ उसके आमाल जाते है, गरीब, बेवाओं, ज़रूरतमन्दों की जितनी ख़िदमात की जा सके, करनी चाहिए,ये खिदमात, ख़ुदा की रज़ा के लिए होनी चाहिए। अल्लाह नीयत पर फैसले देता है।

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