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बनारस में पीएम मोदी ने बताया, आखिर 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने पर जोर क्यों

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव जीतने बाद दूसरी बार आज वाराणसी पहुंचे हैं। उन्होंने यहां बाबतपुर एयरपोर्ट पर लगाई गई पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मूर्ति का अनावरण किया। प्रतिमा अनावरण के बाद पीएम मोदी हरहुआ पहुंचे। यहां प्राथमिक स्कूल के समीप खाली जगह में पीपल का पौधा लगाकर आनंद कानन नवग्रह वाटिका की स्थापना करेंगे। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी में एक कहावत होती है कि size of the cake matters यानि जितना बड़ा केक होगा उसका उतना ही बड़ा हिस्सा लोगों को मिलेगा। इसलिए हमने भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने पर जोर दिया है।

पीएम मोदी ने कार्यकर्ताओं से क्या कहा, पढ़ें 

– आज जितने भी विकसित देश हैं, उनमें ज्यादातर के इतिहास को देखें, तो एक समय में वहां भी प्रति व्यक्ति आय बहुत ज्यादा नहीं होती थी। लेकिन इन देशों के इतिहास में, एक दौर ऐसा आया, जब कुछ ही समय में प्रति व्यक्ति आय ने जबरदस्त छलांग लगाई। यही वो समय था, जब वो देश विकासशील से विकसित यानि Developing से developed nation की श्रेणी में आ गए।

– जब किसी भी देश में प्रति व्यक्ति आय बढ़ती है तो वो खरीद की क्षमता बढ़ाती है। खरीद की क्षमता बढ़ती है तो डिमांड बढ़ती है। डिमांड बढ़ती है तो सामान का उत्पादन बढ़ता है, सेवा का विस्तार होता है और इसी क्रम में रोजगार के नए अवसर बनते हैं। यही प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि, उस परिवार की बचत या सेविंग को भी बढ़ाती है।

– आने वाले 5 वर्ष में 5 ट्रिलियन डॉलर की विकास यात्रा में अहम हिस्सेदारी होगी किसान और खेती की। आज देश खाने-पीने के मामले में आत्मनिर्भर है, तो इसके पीछे सिर्फ और सिर्फ देश के किसानों का पसीना है, सतत परिश्रम है।

– अब हम किसान को पोषक से आगे निर्यातक यानि Exporter के रूप में देख रहे हैं। अन्न हो, दूध हो, फल-सब्जी, शहद या फिर ऑर्गेनिक उत्पाद, हमारे पास निर्यात की भरपूर क्षमता है। इसलिए बजट में कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए माहौल बनाने पर बल दिया गया है।

– आज मुझे काशी से भारतीय जनता पार्टी के सदस्यता अभियान को आरंभ करने का भी अवसर मिला है। हमारे प्रेरणा पुंज डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंति के अवसर पर इस कार्यक्रम का शुभारंभ होना सोने में सुहागा है।

– कल आपने बजट में, उसके बाद टीवी पर और आज अखबारों में एक बात पढ़ी-सुनी-देखी होगी- फाइव ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी। आखिर फाइव ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य का मतलब क्या है, एक आम भारतीय की जिंदगी का इससे क्या लेना-देना है, ये आपके लिए, सबके लिए जानना बहुत जरूरी है

– जरूरी इसलिए भी है क्योंकि कुछ लोग हैं जो हम भारतीयों के सामर्थ्य पर शक कर रहे हैं, वो कह रहे हैं कि भारत के लिए ये लक्ष्य प्राप्त करना बहुत मुश्किल है।

– वो जो सामने मुश्किलों का अंबार है
उसी से तो मेरे हौसलों की मीनार है।
चुनौतियों को देखकर, घबराना कैसा
इन्हीं में तो छिपी संभावना अपार है।
विकास के यज्ञ में जन-जन के परिश्रम की आहुति
यही तो मां भारती का अनुपम श्रृंगार है

– गरीब-अमीर बनें नए हिंद की भुजाएं
बदलते भारत की, यही तो पुकार है।
देश पहले भी चला, और आगे भी बढ़ा
अब न्यू इंडिया दौड़ने को तैयार है,
दौड़ना ही तो न्यू इंडिया का सरोकार है

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