Entertainment Health Politics

कोरोना का कहर थमने का नाम नही ले रहा है। किसी को जान हाथ धोना पड़ रहा है तो किसी को नोंकरी से अफज़ल नदीम

कोरोना का कहर थमने का नाम नही ले रहा है। किसी को जान हाथ धोना पड़ रहा है तो किसी को नोंकरी से अफज़ल नदीम

नई दिल्ली – देश के बड़े मीडिया समूह “हिंदुस्तान टाइम्स” जैसे संस्थानों से कई संपादकों सहित लगभग समेत 150 मीडिया कर्मियों को निकालने की खबरें हैं। जबकि कई एडिशन बंद करने की सूचना आ रही है।

देश के प्रख्यात अंग्रेजी समाचार पत्र हिंदुस्तान टाइम्स और बिजनेस अखबार ‘मिंट’ से लगभग 30 फीसदी मीडियाकर्मियों की छंटनी किए जाने औऱ वेतन में कटौती की सूचना है। ऐसे ऊमदा संस्थान से डेढ़ सौ से ज्यादा लोगों को अपना रोज़गार खोना पड़ा है।

हिंदुस्तान टाइम्स ग्रुप के अलावा कई मीडिया समूहों से संस्करण बंद करने, छंटनी करने और वेतन कटौती की खबरें लगातार आ रही है। मेरा सवाल इन बड़े मीडिया समूह और सरकार दोनों से है कि राज्यों और केंद्र की सरकार से करोड़ों का विज्ञापन लेने के बाद भी इतने बड़े मीडिया संस्थान अगर दो महीने भी अपने कर्मचारियों की वेतन नहीं दे पा रहे हैं। तो छोटे और लघु समाचार पत्रों की क्या हालत होगी। केंद्र सरकार को इस पर तत्काल संज्ञान लेने की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा संकटकाल के लिए घोषित बीस लाख करोड़ के राहत पैकेज में मीडिया के लिए भी प्रावधान करने की आवश्यकता है। एक मीडिया संगठन होने के नाते मीडियाकर्मियों को ‘कोरोना योद्धा” घोषित करने और 50 लाख रुपये का बीमा देने के लिए देश का सबसे बड़ा एवं लोकप्रिय संगठन “नेशनल यूनियन ऑफ़ जॉर्नलिस्ट्स (इंडिया) के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रासबिहारी और तमाम राज्यों की इकाइयों के अध्यक्षों और महासचिवों ने प्रधानमंत्री, श्रम मंत्री सूचना एवं प्रसारण मंत्री एवं तमाम मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखे हैं।

जाहिर है कि देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री के इस आह्वान के बाद भी कि कोई भी संस्थान अपने कर्मचारियों को कोरोना महामारी के मद्देनजर छटनी और वेतन कटौती नहीं करेगा। उसके बावजूद कुछ मीडिया समूह इस प्रकार से लगातार छटनी और वेतन कटौती कर रहे हैं। ये सीधे तौर पर प्रधानमंत्री के आह्वान की अवहेलना है। इस मामले पर सरकार को तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *