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*पत्रकारों को सच्च लिखने की मिलती है सजा।* *पुलिस द्वारा जुठे केस में साजिश रच के फसाया जाता है।

*पत्रकारों को सच्च लिखने की मिलती है सजा।*
*पुलिस द्वारा जुठे केस में साजिश रच के फसाया जाता है।*
*बिसल ब्लोअर की भूमिका निभाने वाले लोगो को फसाना एक आम बात बन गयी है।*
*सच्च के लिए आवाज़ उठाने वाले लोगो पे पुलिस द्वारा खंडिनी और महिला से छेड़छाड़ का जूठा मुकदमा दर्ज कराया जाता है।*

*पुलिस थाने में लगे सीसीटीवी बंद है।*

मनोज दुबे

घाटकोपर पुलिस थाने द्वारा बहोत से लोगो को जुठे केस में फ़साने का मामला सामने आया है।
घाटकोपर पुलिस थाने की हद में कुछ पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत से गैरकानूनी काम बिंदास चल रहे है।घाटकोपर पुलिस थाने द्वारा केस में जुठे पंच बनाये जाते है जो लगभग हर केस में पंच बनते है।घाटकोपर थाने की हद में बड़े पैमाने पर ओर्केस्ट्रा बार के नाम पर डान्स बार चलाया जा रहा है कई बार मालिक अवैध तरीके से बार चला रहे है जिनपे घाटकोपर के कुछभ्रष्ट अधिकारियों का सरक्षण प्राप्त है।
स्कूल कॉलेज के पास बड़े पैमाने पर ड्रग्स का कारोबार चल रहा है।नित्यानंद नगर में राम रहीम मित्र मंडल के पास कई अनगिनत शिकायत पुलिस थाने को दी गयी है फिर भी खुलेआम ड्रग्स का कारोबार चल रहा है।नित्यानंद नगर में रेड लाइट एरिया चलाया जा रहा है जहाँ करीब में मंदिर है गल्ली से गुजरने वाले लोगो से पैसे मोबाइल छीन लिए जाते है।और जब शिकायक्त कर्ता पुलिस थाने आता है शिकायत लेके तो उसके साथ ही उल्टा सवाल पूछा जाता है।
लॉज के नाम पर बड़े पैमाने जिस्मफरोशी का धन्धा घाटकोपर पुलिस थाने की हद में चल रहा है।
रात के वक़्त तेल चोरी का काम अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है रात के वक़्त देर रात 4 बजे तक रोड पे अवैध धंधे लग रहे है। जिसकी वजह से रात के वक़्त महिलाओं से छेड़छाड़ और चोरी जैसे वारदात होते है।जगह-जगह मटका जुगार क्लब चल रहा है पान शॉप पे खुलेआम गुटखा बेचा जा रहा है।
घाटकोपर में रोड पे धंधे लगाने वालों से मोटी रक्कम पुलिस वालों को मिलती है जिसकी वजह से गैरकानूनी काम बिंदास चलता है।
डॉय डेय के दिन भी दारू बेची जाती है।
घाटकोपर पोलिस थाने के भीतर हुवे हमले की सीसीटीवी फुटेज नही दी जाती है क्या सीसीटीवी बंद किये गए है?


घाटकोपर पुलिस थाने की हद में रहने वाले पत्रकार मनोज दुबे ने एक महिला जिसे एक पुलिस उपनिरीक्षक ने शारीरिक शोषण किया था जिसकी शिकयात घाटकोपर थाने नही ले रही थी ऐसे में लड़की की सहायता दुबे ने की और घाटकोपर में हो रहे गलत काम की जानकारी हमेशा उच्च अधिकारियों को दुबे देते आये है जिसकी वजह से घाटकोपर के कुछ अधिकारी दुबे से नाराज रहते है।जिस पोलिस उपनिरीक्षक ने दुबे पे फ़र्ज़ी केस बनवाया उसी पुलिस निरीक्षक ने जुठे केस में घाटकोपर के दो कॉन्स्टेबल को भी फसाया था जिसकी जांच होने के बाद सब बात सामने आयी कि सभी लगाए गए आरोप गलत है और आरोपी पुलिस उपनिरीक्षक फरार है और आरोपी महिला जो गवाह बनने का काम करती थी वो जेल में बंद है।
पत्रकार मनोज दुबे के अलावा घाटकोपर पुलिस थाने द्वारा बहोत से निर्दोष लोगों को फसाया गया है।
कई पुलिस अधिकारी पैसे लेके 326,307 जैसे केस को 324 में बदल देते है और पुलिस थाने द्वारा जमानत दे देते है।घाटकोपर पुलिस थाने में कई पुलिस अधिकारीयो पे स्थानीक लोगो के तक्रार दिए गए है।
जो इस बात को साबित करती है कि कुछ अधिकारी अपने पद और वर्दी का गलत इस्तेमाल कर रहे है।
चैन स्नेचर और मोबाइल चोरो का आतंक मचा हुवा है।
पत्रकार,समाज सेवक,आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा घाटकोपर पुलिस को गलत काम की जानकारी देना पसंद नही आता है इस लिये कुछ पुलिस वाले ऐसे लोगो पे जुठे मुकदमे दर्ज करके फसा देते है की दुबारा ऐसे लोग शिकायत ना करे अगर पुलिस पैसे नही लेती तो अवैध धंधे कैसे चलते लोगो को अत्तिरिक्त पुलिस आयुक्त,डीसीपी के पास शिकायत लेके जाने की जरूरत क्यों पड़ती है।पत्रकार दुबे ने एक मुस्लिम बेसहारा लड़की की साहयता की थी जिसे घाटकोपर पुलिस भगा देती थी जिसकी तक्रार नही लेती थी ।पत्रकार दुबे को कुछ पुलिस वालों ने साजिश के तहत फसाया दुबे ने आरटीआई में सीसीटीवी फुटेज की मांग की थी जो दिया नही गया बताया गया कि सीसीटीवी में फुटेज नही आयी इस बात से ये साबित होता है कि दुबे को साजिश के तहत फसाया गया और सीसीटीवी कैमरे बंद रखे जाते है। दुबे पे जूठी एफआईआर की गई जबकि दुबे पे ही जानलेवा हमला पुलिस थाने के भीतर डयूटी अधिकारी के समझने हुवा जिसकी मेडिकल रिपोर्ट की दुबे ने दी थी फिर भी एक तरफा काम।करते हुवे घाटकोपर के कुछ अधिकारियों ने दुबे पे फ़र्ज़ी केस बना डाला।कई लोगो के शिकायत अर्ज़ 5 से 6 माहीनो से पेंडिंग पड़े है जिसपे घाटकोपर पुलिस ने कारवाई नही की
और दुबे ने सबसे पहले अपनी शिकायत की थी और मेडिकल भी कराया था बिना किसी सबूत के धारा 384 के तहत जूठा मुकदमा दर्ज किया गया दुबे के खिलाफ फ़र्ज़ी मुकदमा बना दिया गया।
घाटकोपर में पुलिस अधिकारियो के कमरे में लगे गैरकानूनी तरीके से एयर कंडीशनर लगाया गया है वो किसने लगाया प्रति माह 30 से 40 हजार बिजली बिल का नुकसान ऐसे अधिकारियों द्वारा हो रहा है।
रात के वक़्त सड़क खुदाई के चलते करीबन 25 से 30 लाख के केबल चोरी किये गए पुलिस के होते हुवे रात के वक़्त कैसे हुवी चोरी रात में पेट्रोलियम के वक़्त क्या पुलिस को ये सब नजर नही आता।पैसे लेके केस में बडलाव करना आरोपी बदली करना एक आम बात बन गयी है भ्रष्टाचार करके कई अधिकारियों ने लाखों रुपये की महंगी कार खरीद ली है।लॉकडाउन में कई गुटखा वालो को उठाकर लया गया और उनसे मोटी रक्कम लेके छोड़ दिया गया।
पत्रकार दुबे के अनुसार उनके पास बार मटका जुगार क्लब गुटखा माफिया सभी के वीडियो है जो साबित करते है कि अधिकारियों का अशीर्वाद इनको प्राप्त है।
घाटकोपर में कई पुलिस वालों पे जनता द्वारा शिकायत दर्ज की गई है लेकिन उनको बचाने का काम उच्च अधिकारी कर रहे है।जुगार क्लब पे कारवाई करके लोगो के पैसे पुलिस वाले खुद रख लेते है जिसकी सच्चाई मनोज दुबे ने सामने लायी ऐसे बहोत सारी सच्चाई मनोज दुबे द्वारा लायी गयी है इस लिए कुछ भ्रष्ट अधिकारी दुबे को फ़साने की साजिश रचते है।
पुलिस आयुक्त परिमंडल सात द्वारा पुलिस उपनिरीक्षक जिसने दुबे ले जुठे केस बनवाये थे उसकी बात सामने आ चुकी है फिर भी घाटकोपर पुलिस दुबे को फसाने में लगी है।
दुबे ने अनुसार उनके केस की जांच करने वाले अधिकारियों को बदल देना चहाई और अपराधियों का साथ देने वाले अधिकारियों पे सख्त कारवाई होनी चाहिए दुबे ने हमेशा गलत काम के खिलाफ आवाज़ उठाई है और आगे भी उठाते रहेंगे।

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