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जयपुर में मुंबई बोरीवली पुलिस के पुलिस उपनिरीक्षक और तीन कांस्टेबल होटल में 2 लाख रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार।

जयपुर में मुंबई बोरीवली पुलिस के पुलिस उपनिरीक्षक और तीन कांस्टेबल होटल में 2 लाख रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार।


मनोज दुबे

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) जयपुर की स्पेशल टीम ने मुंबई पुलिस के एक पुलिस उपनिरीक्षक और उसके तीन साथी कांस्टेबल को 2 लाख रुपए की रिश्वत लेते मंगलवार देर शाम को गिरफ्तार कर लिया। रिश्वत की यह रकम मुंबई के बोरीवली थाने में दर्ज धोखाधड़ी के एक मुकदमे में कार्रवाई नहीं करने के लिए मांगी जा रही थी।
एसीबी के डीजी बीएल सोनी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी प्रशांत शिंदे (32) मुंबई बोरीवली पुलिस थाने में पुलिस उपनिरीक्षक है। जबकि तीनों आरोपी लक्ष्मण तड़वी, सुभाष पांडुरंग और सचिन अशोक गुड़के है। ये तीनों भी बोरीवली थाने में पुलिस कांस्टेबल है।
धोखाधड़ी के केस में आरोपी के मकान मालिक को जबरन उठाकर मांगी रिश्वत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो महानिदेशक बीएल सोनी ने बताया कि सिरसी रोड निवासी परिवादी अमन शर्मा ने एसीबी में शिकायत दर्ज करवाई थी कि उनके जयपुर स्थित मकान में किराए से रहने वाले मुंबई निवासी विनोद के खिलाफ मुंबई बोरीवली थाने में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज था। विनोद मुंबई का रहने वाला है। वह जयपुर में अमन के यहां किराए से रहता है और कपड़े का काराेबार करता है।
उसके खिलाफ दर्ज केस में अनुसंधान कर रहे बोरीवली थाने के सबइंस्पेक्टर प्रशांत शिंदे और तीनों पुलिसकर्मी सोमवार को जयपुर पहुंचे। यहां फरार चल रहे विनोद के मकान मालिक को जबरन पकड़ लिया। इन चारों पुलिसकर्मियों ने मकान मालिक पर दबाव बनाया कि वे आरोपी विनोद को किसी भी तरह पकड़वा दें। इसके बाद इन पुलिसकर्मियों ने अमन शर्मा से उसके पिता को गिरफ्तार नहीं करने के लिए 2 लाख रुपए की रिश्वत की मांग की।
रेलवे स्टेशन के पास होटल में रिश्वत लेते पकड़े गए चारों पुलिसकर्मी
एसीबी के एडीजी दिनेश एम.एन के निर्देशन में विशेष अनुसंधान इकाई के प्रभारी एडिशनल एसपी संजीव नैन के नेतृत्व में मांग का सत्यापन करवा कर ट्रेप रचा गया। घूसखोरी के आरोपी पुलिसकर्मियों ने परिवादी अमन को जयपुर में रेलवे स्टेशन स्थित गंगा होटल में 2 लाख रुपए की रिश्वत लेकर बुलाया। जहां रिश्वत लेने के बाद इशारा मिलते ही मुंबई के चारों पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के अंतर्गत दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।

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