Health International National Politics Social States Uncategorized

#सरकार के प्रस्ताव को ठुकराने वाले किसान क्या अम्बानी-अडानी से लड़ पाएँगे ?#सीनियर पत्रकार चौधरी अफज़ल नदीम की खास रीपोर्ट

#सरकार के प्रस्ताव को ठुकराने वाले किसान क्या अम्बानी-अडानी से लड़ पाएँगे ?#सीनियर पत्रकार चौधरी अफज़ल नदीम की खास रीपोर्ट

नई दिल्ली-किसान आंदोलन मुद्दों के प्रति समझ और समझ के प्रति घोर ईमानदारी का उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। किसान संगठनों को बातचीत के नाम पर फूट पड़ने के कच्चे माल के रूप में पेश किया गया। मगर किसान उतने ही एकजुट हुए जा रहे हैं। अभी किसान संगठनों के ढाँचे को भीतर से समझा जाना बाक़ी है। आख़िर वे टूटे क्यों नहीं जबकि बातचीत करने वाला फूट डालने और तोड़ देने का ही मास्टर खिलाड़ी माना जाता है। किसानों ने रिलायंस और अडानी के विरोध का एलान कर बता दिया है कि गाँवों में इन दो कंपनियों की क्या छवि है। किसान इन दोनों को सरकार के ही पार्टनर के रूप में देखते हैं। जनता अब बात बात में कहने लगी है कि देश किन दो कंपनियों के हाथ में बेचा जा रहा है। विपक्षी दलों में राहुल गांधी ही अम्बानी अडानी का नाम लेकर बोलते हैं बाक़ी उनकी पार्टी और सरकारें भी चुप रहती हैं।

किसानों ने रिलायंस और अडानी के प्रतिष्ठानों के बहिष्कार का एलान किया है। हो सकता है व्यावहारिक कारणों से सारे किसान रिलायंस जियो का सिम वापस न कर पाएँ। लेकिन जिस जियो के ज़रिए उन तक व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी मुफ़्त में पहुँची है अब वे उसके ख़तरे को समझने लगे हैं। यहाँ जियो एक प्रतीक के रूप में देखा जाना चाहिए। न कि सिर्फ़ एक कंपनी के विरोध के रूप में। तालाबंदी के दौर में जब छोटे से लेकर बड़े उद्योग धंधे बिखर रहे थे,अम्बानी अडानी के मुनाफ़े में कोई गुना वृद्धि की ख़बरों का जश्न मनाया जा रहा था। अब वही अम्बानी और अडानी किसानों के निशाने पर हैं। यह कोई छोटी घटना नहीं है। हो सकता है इससे दोनों घरानों को फ़र्क़ न पड़े लेकिन जनता का एक हिस्सा अपने जनजीवन पर कोरपोरेट के राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव को समझने लगा है।

किसान देख रहे थे कि इस क़ानून के आने के पहले ही बिहार,उत्तर प्रदेश,मध्यप्रदेश से लेकर पंजाब तक में भारतीय खाद्य निगम अडानी समूह से भंडारण के लिए करार कर चुका है।अडानी ने बड़े बड़े भंडारण गृह बना भी दिये हैं। अगर FCI की मंशा ठीक होती तो वह भी अडानी की कंपनी तरह इस तरह के भंडार गृहों का निर्माण करती। तब फिर वह कह सकती थी कि सारा भंडारण FCI नहीं कर सकती है, प्राइवेट पार्टी की भागीदारी ज़रूरी है। भंडारण को लेकर बजट की घोषणा कहाँ जाती है पता नहीं। कृषि मंत्री क्यों नहीं ट्वीट करते हैं कि उनकी सरकार ने भी अडानी की तरह भंडार गृह बनाए हैं? और अडानी के भंडार गृह FCI की ज़मीन पर नहीं बने हैं?

पंजाब,उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और बिहार में अडानी ने जिस तरह के भंडार गृह का निर्माण किया है और FCI ने तीस साल तक किराया देने की गारंटी दी है, इसे लेकर पब्लिक में व्यापक रूप से सफ़ाई आनी चाहिए। अडानी की नई कंपनी ने नये क़ानून से कितने दिन पहले भंडारण का काम शुरू किया है और भंडारण को लेकर उनकी कंपनी किस तरह का विस्तार कर रही है?

राजनीति में परिवारवाद ख़त्म करने के नाम पर तथाकथित नैतिक बढ़त का दावा करने वाले नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में उनकी अपनी ही पार्टी में परिवारवाद मज़बूत हुआ है। यही चीज़ आप औद्योगिक घरानों के संदर्भ में भी देख सकते हैं।
स्टार्ट अप इंडिया के झाँसों से निकल कर देखेंगे तो साफ दिखता है कि वे आर्थिक जगत में घरानों को कैसे मज़बूत कर रहे हैं। पुराने औद्योगिक घरानों को ख़त्म करने के नाम पर इन घरानों की संख्या सीमित की जा रही है और उनके कारोबार और प्रभाव का विस्तार किया जा रहा है। किसान अब देखने लगे हैं ।

यह सारा कुछ नए क़ानून आने के समय के साथ क्यों होता दिखता है? ऐसा क्यों लगता है कि तैयारी पहले कर ली गई है और क़ानून बाद में आया है? ऐसा क्यों है कि अम्बानी और अडानी के विस्तार का संबंध सरकार के किसी नीतिगत फ़ैसले से दिखता है? क्या BSNL के लाखों कर्मचारी नहीं जानते या कहते कि रिलायंस के जीयो के लिए BSNL-MTNL को बर्बाद कर दिया गया। मोदी सरकार के दौर में एक नवरत्ना कंपनी मिट्टी हो गई? किसानों ने अम्बानी और अडानी के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों का एलान कर बहुत बड़ा जोखिम लिया है। इनके प्रभाव में गोदी मीडिया किसान आंदोलन को लेकर और हमलावर होगा। किसानों को गोदी मीडिया से तो लड़ना ही होगा अब उन्हें बग़ैर मीडिया के अपने आंदोलन को चलाने की आदत भी डालनी होगी। मीडिया कारपोरेट का है। किसान का नहीं। गोदी मीडिया के लिए किसान आतंकवादी है। खालिस्तानी है। किसान इस लड़ाई में चारों तरफ़ से निहत्थे घेर लिए गए हैं। बात क़ानून की नहीं है। उसके वजूद की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *