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मंगलौर में बज़्म ए उनवान चिश्ती की जानिब से शानदार मुशायरा,नशिस्त का आयोजन।

मंगलौर में बज़्म ए उनवान चिश्ती की जानिब से शानदार मुशायरा,नशिस्त का आयोजन।

नन्हा बच्चा सोच रहा है चुप चुप,
आखिर क्यों दीवार उठी है आंगन में।

हरिद्वार/ मंगलौर( ज़ीशान काज़मी
कस्बा मंगलौर की प्रसिद्ध सामाजिक संस्था,अखिल भारतीय बज़्म ए उनवान चिश्ती,एवम काव्य शोध संस्थान के तत्वावधान में एक शानदार मुशायरा नशिस्त, मशहूर शायर डॉक्टर शमीम देवबंदी के सम्मान में एवं अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि / शायर कौसर कैरानवी की अध्यक्षता मे, शाह विलायत मॉडर्न गर्ल्स कॉलेज में आयोजित की गई। जिसमें मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री (उत्तराखंड सरकार )सैयद हैदर अली जैदी,मेहमान ए ख़ुसूसी सैयद नुज़ार काज़मी, गुलाम रसूल एडवोकेट वगैराशामिल रहे। नशिस्त के आगाज़ में प्रोफेसर तनवीर चिश्ती ने मंगलौर एवम जनपद हरिद्वार की अज़ीम शख्सियत,साहित्यिक सेवाओ में बेहतरीन योगदान देने वाले प्रोफेसर उनवान चिश्ती के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि- प्रोफेसर उनवान चिस्ती का हिंदी एवं उर्दू छंद शास्त्र में बड़ा अहम योगदान रहा है।उन्होंने हजारों विद्यार्थियों की साहित्यिक एवं काव्यात्मक रहनुमाई की है,जो कभी नही भुलाई जा सकती।
मुशायरा नशिस्त के शानदार प्रोग्राम में मशहूर शायर हज़रात ने अपने कलाम पेश किए,खूब वाह वाही बटोरी। मशहूर शायर कौसर ज़ैदी कैरानवी ने कुछ यूँ बयान किया,, मैंने तमाम शहर में अखलाक बाँटकर, यह तजुर्बा किया की मुखालिफ बढ़ा लिए। प्रोफेसर तनवीर चिश्ती ने यूँ अर्ज़ किया कि- काश ये मकदूर होता तजुर्बे के वास्ते, मैं तेरी जुल्फें तो क्या खुशबू को छू कर देखता। मशहूर शायर डॉ शमीम देवबंदी ने दिल को छू लेने वाले अल्फाज़ो में कुछ यूँ कहा- नन्ना बच्चा सोच रहा है चुप चुप सा आखिर, क्यों दीवार उठी है आंगन में । शायर सलीम कुरैशी – साथ किसी का ऐसे छूटा,पेड़ से जैसे पत्ता टूटा । दीगर शायर/ कवि डॉक्टर सादिक देवबंदी,कलीममुशीरी देहलवी, चांद देवबंदी,मंसूर मंगलोरी, समर मंगलोरी ,सैयद मोनिस काज़मी, शहजाद रजा, अबरार मंगलोरी, नियाज मंगलोरी, मौलाना रईस कलियरी असजद राणा,आदि ने अपनी कविताओं, शायरी से समा ऐसा बांधे रखा कि हर एक को ख़ुशगवार माहौल से दिल जीत कर नशिस्त को बेहद कामयाब बनाया।

इस मुशायरे नशिस्त में प्रिंसिपल एहसान अंसारी डॉक्टर परवेज़, शाकिर मलिक,मो0 अनीस, शाहबाज, हाफिज अब्दुल समद अंसारी का सराहनीय योगदान रहा।कार्यक्रम के संयोजक प्रोफेसर तनवीर चिश्ती साहब ने सभी मेहमानों का तह दिल से शुक्रिया अदा किया।बज़्म ए अदब की जानिब से कवियों,शायरों,समाजसेवियों को एजाज से नवाजा गया।

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