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वो खातून आखिर कौन थी,,,?

वो खातून आखिर कौन थी,,,?

शामली जनपद के कस्बा जलालाबाद के युवा एवम शिक्षित समाज सेवी ,सैयद हिफ्ज़ुल्क़दीर ,जो इंसानी ख़िदमात का बेहद जज़्बा रखते है ।गुजिश्ता दिनों वो अपनी अहलिया वाईफ के साथ दिल्ली के एक होटल में खाना खा रहे थे,,,, उस वक़्त उनके साथ इन्सानियत के किरदार से वाक़या गुजरा,,,, एक सबक ,,, आपकी नजर ,,,, । सैयद हिफ्ज़ुल्क़दीर अपनी फ़ेमली के साथ एक रेस्टोरेंट में खाना खा रहे थे । मेरी छोटी सी बच्ची इस दौरान ज़ोर ज़ोर से रोने लगी उसको शायद दूध की खुहाइश थी उसके रोने से वो और उनकी अहलिया परेशान से हो गये। वहाँ बोहत से लोग मौजूद थे वहीं एक ख़ातून अपने परिवार के साथ मौजूद थीं जो अलग समाज से थी और हमारे लिये अजनबी थीं वो अपनी नशिस्त से उठकर हमारे पास आयीं और कहा आप आराम से खाना लीजिये,,,, मैं, बच्ची को सँभालती हूँ ।यह कहकर उन्होंने माँ की गोद से बच्ची को ले लिया। और उसे लेकर टहलने लगी उनकी गोद में जाकर बच्ची चुप हो गयी । ये मंज़र देख कर मैं और मेरी अहलिया हैरानी और शुकराने की नज़रों से उस महरबान ख़ातून को देखते रह गये। खाना खाने के बाद ,हमने बोहत अदब के साथ उन अजनबी महरबान * खातून *का शुक्रिया अदा किया।दिल मे यह सवाल गर्दिश कर रहा था,,,, आख़िर ये अजनबी खातून कौन थी,,,,??


बज़ाहिर यह छोटा सा किस्सा है लेकिन इससे हमारे गंगा-जमुनी मिलनसारी और मोहब्बत की ऐसी तसवीर हमारे सामने उभरकर सामने आती है जो लाख नफ़रतों के ज़हर से बेनियाज़,इन्सानियत का पैगाम देती, असली धरातल को पेश करने की सच्ची हकीकत है।
ऐसे जज़्बों की सराहना होनी ही चाहिये।एकता भाईचारा, प्रेम सौहार्द, आपसी सहयोग प्रेम भावना,राष्ट्र का प्राण है।
साभार- डॉ सऊद हसन,,प्रस्तुति- ज़ीशान काज़मी, जलालाबाद,शामली ।

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