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शामली में लाला लाजपतराय की जयंती मनाई गई।

शामली में लाला लाजपतराय की जयंती मनाई गई।

जलालाबाद, शामली( उत्तर प्रदेश, ज़ीशान काज़मी) स्वतंत्रता सेनानी पंजाब केसरी,लाला लाजपतराय की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई उनके जीबन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए,उनके पद चिन्हों पर चलने का संकल्प लिया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शामली श्री श्री कात्यायनी देवी ट्रस्ट द्वारा जयंती मनाई गई। यहाँ पर अनिल कुमार अग्रवाल, आशीष संगल, ललित गर्ग, टेक चंद मित्तल, श्रीमती दिव्या गर्ग, वीरेन्द्र गुप्ता, जीव जंतु, गौ माता सेवा समिति के सचिव नंद किशोर,आदि ने लाला लाजपतराय जी के पद चिन्हों पर चलने के लिए प्रेरित किया।इस अवसर पर ट्रस्ट के ऑडिटर एवम भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ मुकेश शास्त्री( जलालाबाद) ने विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि-
पंजाब केसरी ,लाला लाजपतराय जी का जन्म पंजाब के फिरोजपुर जिले के एक गाँव में 28 जनवरी, 1865 को हुआ था। अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि के लाला लाजपतराय ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से फारसी की तथा पंजाब विश्वविद्यालय से अरबी, उर्दू एवं भौतिकशास्त्र विषय की परीक्षाएँ एक साथ उत्तीर्ण कीं। 1885 में कानून की डिग्री लेकर वे हिसार में वकालत करने लगे।

उन दिनों पंजाब में आर्यसमाज का बहुत प्रभाव था। लाला जी भी उससे जुड़कर देशसेवा में लग गये। उन्होंने हिन्दू समाज में फैली वशांनुगत पुरोहितवाद, छुआछूत, बाल विवाह जैसी कुरीतियों का प्रखर विरोध किया। वे विधवा विवाह, नारी शिक्षा, समुद्रयात्रा आदि के प्रबल समर्थक थे। लाला जी ने युवकों को प्रेरणा देने वाले जोसेफ मैजिनी, गैरीबाल्डी, शिवाजी, श्रीकृष्ण एवं महर्षि दयानन्द की जीवनियाँ भी लिखीं।

1905 में अंग्रेजों द्वारा किये गये बंग भंग के विरोध में लाला जी के भाषणों ने पंजाब के घर-घर में देशभक्ति की आग धधका दी। लोग उन्हें ‘पंजाब केसरी’ कहने लगे। इन्हीं दिनों शासन ने दमनचक्र चलाते हुए भूमिकर व जलकर में भारी वृद्धि कर दी। लाला जी ने इसके विरोध में आन्दोलन किया। इस पर शासन ने उन्हें 16 मई, 1907 को गिरफ्तार कर लिया।
लाला जी ने 1908 में इंग्लैण्ड, 1913 में जापान तथा अमरीका की यात्रा की। वहाँ उन्होंने बुद्धिजीवियों के सम्मुख भारत की आजादी का पक्ष रखा। इससे वहाँ कार्यरत स्वाधीनता सेनानियों को बहुत सहयोग मिला।

पंजाब उन दिनों क्रान्ति की ज्वालाओं से तप्त था। क्रान्तिकारियों को भाई परमानन्द तथा लाला लाजपतराय से हर प्रकार का सहयोग मिलता था। अंग्रेज शासन इससे चिढ़ा रहता था। उन्हीं दिनों लार्ड साइमन भारत के लिए कुछ नये प्रस्ताव लेकर आया। लाला जी भारत की पूर्ण स्वाधीनता के पक्षधर थे। उन्होंने उसका प्रबल विरोध करने का निश्चय कर लिया।

30 अक्तूबर, 1928 को लाहौर में साइमन कमीशन के विरोध में एक भारी जुलूस निकला। पंजाब केसरी लाला जी शेर की तरह दहाड़ रहे थे। यह देखकर पुलिस कप्तान स्कॉट ने लाठीचार्ज करा दिया। उसने स्वयं लाला जी पर कई वार किये। लाठीचार्ज में बुरी तरह घायल होने के कुछ दिन बाद 17 नवम्बर, 1928 को लाला जी का देहांत हो गया।
थानाभवन के लाला लाजपतराय राय कॉलिज में भी हर्षोल्लास के साथ जयंती मनाई गई।यहाँ कार्यक्रम में प्रधानाचार्य चंदेश्वर प्रसाद, राजीव कुमार, गंगाराम मौर्य,अशोक कुमार,एन सी सी अधिकारी,सुरेंद्र सिंह,एन सी सी अधिकारी एस डी, अंग्रेज़ी प्रवक्ता आदिल खान,मनोज कुमार, शिवराम, देबचन प्रसाद,लवलेश कुमार, आदि अध्यापक गण,एवम छात्र उपस्थित रहे।
प्राथमिक विद्यालय नम्बर एक मे भी हर्षोल्लास के साथ जयंती मनाई गई।
यहाँ पर अनिता देवी ,सुनीता शर्मा, काजल जैन, ममता रानी, दिव्या गर्ग, सानिया नीलम चौधरी, इंदु सिंह रेखा, एवम रजनीश,ज़ुबैर अहमद, श्रवणदेव,आदि शामिल रहे। जलालाबाद में भी अनेक जगहों पर जयंती पर कार्यक्रमो का आयोजन कर लाला लाजपतराय राय के जीवन पर प्रकाश डालकर उनके पद चिन्हों पर चलने,उनकी शिक्षाओं का अनुसरण करने,उन्हें याद करते हुए जयंती मनाई गई ।

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