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महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने सचिन वाजे और कमिश्नर परमबीर सिंह के बारे में कहा कि जांच में कुछ ऐसी गलतियां सामने आईं, जो माफ करने जैसी नहीं हैं।

महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने सचिन वाजे और कमिश्नर परमबीर सिंह के बारे में कहा कि जांच में कुछ ऐसी गलतियां सामने आईं, जो माफ करने जैसी नहीं हैं।

मुंबई:-मनोज दुबे(क्राइम रिपोर्टर)

उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर स्कॉर्पियो में मिले विस्फोटक मामला दिन पे दिन बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को इस मामले में महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने सचिन वाजे और कमिश्नर परमबीर सिंह के बारे में कहा कि जांच में कुछ ऐसी गलतियां सामने आईं, जो माफ करने जैसी नहीं हैं। जांच निष्पक्ष हो इसलिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने परमबीर सिंह का तबादला कर दिया है। अनिल देशमुख ने ये बयान एक मराठी चैनल के वार्षिक कार्यक्रम के दौरान दिया।

एंटीलिया के बाहर विस्‍फोटकों से भरी स्‍कॉर्पियो के मालिक मनसुख हिरेन की बुधवार को डायटम रिपोर्ट आई थी, लेकिन अब इसको लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, एटीएस को शक है कि मनसुख को जिंदा पानी में फेंका गया, जिसके बाद उसकी पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर्स की टीम भी सवालों के घेरे में है।
मनसुख की जो डायटम रिपोर्ट आई है, उसकी जानकारी ATS को मंगलवार रात को ही मिल गयी थी। ये रिपोर्ट उस सैम्पल्स से मिली है, जो मनसुख की पहली पोस्टमार्टम के बाद घरवालों और मनसुख के निजी डॉक्टर्स के दबाव के बाद शवगृह में रखी बॉडी से लिया गया था। इसमें कहा गया कि मनसुख जब पानी में गिरा था तो वह जिंदा था।जिसको लेकर एनआईए को यकीन नहीं हो रहा है और वह इस मौत में हत्‍या का एंगल देख रही है।
एटीएस के डीआईजी ने डायटम रिपोर्ट को हरियाणा की लैब में भेजने की बात कही थी। रिपोर्ट आने के बाद कल एटीएस के डीआईजी सहित 2 अधिकारी एक साथ ठाणे एटीएस के दफ्तर पहुंचे थे और उन्होंने डॉक्टर्स की टीम को बुलाया। एटीएस सूत्रों के मुताबिक, पोस्‍टमार्टम करने वाले डॉक्टर्स से पहले तो डायटम रिपोर्ट के बारे में पूछा गया और बाद में पूछा गया कि उन लोगों ने इतने गंभीर मामले में पीएम के पहले वो सैम्पल क्यों नहीं लिया जिसे परिवार के दबाव के बाद शवगृह में पड़ी बॉडी से लेना पड़ा।
डॉक्‍टरों से पूछा गया कि क्या उनपर किसी का दबाव था। डॉक्टर्स से कौन-कौन लोग मिलने आये थे, क्या बातचीत हुई थी या किसी का फ़ोन आया था। पोस्‍टमार्टम के लिए पूरे सैम्पल पहली बार में ही क्यों फोरेंसिक के लिए नहीं भेजे गए। मिली जानकारी के अनुसार, 6 घंटे तक इन डॉक्टर्स की टीम से पूछताछ की गई। डॉक्टर्स से अस्पताल आए लोगों का रिकॉर्ड मांगा गया, लेकिन कोई लिखित रिकॉर्ड मौजूद नहीं था।

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