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एनआईए का खुलासा निलंबित अधिकारी सचिनवाजे ने थ प्रदीप शर्मा को मनसुख हिरेन की हत्या की सुपारी

एनआईए का खुलासा निलंबित अधिकारी सचिनवाजे ने थ प्रदीप शर्मा को मनसुख हिरेन की हत्या की सुपारी

मुंबई – इंद्रदेव पांडे

उद्योगपति मुकेश अंबानी  के मुंबई स्थित घर एंटीलिया के बाहर विस्फोटक रखने के मामले में बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के ख़िलाफ़ आरोप पत्र दायर होने के बाद इस मामले में बड़ी खबर सामने आई है. आरोप पत्र में मनसुख हिरेन को खत्म करने की साजिश का खुलासा किया गया है. मनसुख हिरेन की हत्या की सुपारी पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा को दी गई थी.

एनआईए  ने 3 सितंबर को दायर की गई चार्जशीट में यह दावा किया है कि हिरेन की हत्या के लिए सचिन वाजे ने प्रदीप शर्मा को सुपारी दी थी. इसके लिए प्रदीप शर्मा को वाजे ने नोटों से भरा बैग दिया था. जो खबर निकल कर सामने आई है उसके मुताबिक सचिन वाजे को यह डर था कि हिरेन टूट जाएगा और अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक रखने की साजिश का खुलासा कर देगा. सचिन वाजे सुपर कॉप बनना चाहता था. वो बड़े और मालदार लोगों में डर का दबदबा पैदा कर एक्सटॉर्शन के धंधे को चमकाना चाहता था. हिरेन अगर राज उगल देता तो वह इस रास्ते में रोड़ा बन जाता.

2 मार्च को हुई मीटिंग, 4 मार्च को मर्डर

मनसुख हिरेन की हत्या का काम हाथ में लेने के बाद प्रदीप शर्मा ने संतोष शेलार  से बात की और पैसे के लेन-देन की बात कर के हत्या की साजिश में शामिल कर लिया. 4 मार्च को हिरेन की हत्या हुई और 2 मार्च ये लोग एक साथ मिले और हत्या की प्लानिंग की. चार्ज शीट में यह खुलासा हुआ है कि  2 मार्च को सचिन वाजे ने एक मीटिंग बुलाई थी. इस मीटिंग में सुनील माने और प्रदीप शर्मा मौजूद थे. मनसुख हिरेन को वहां पहले ही बुला लिया गया था.

प्रदीप शर्मा के सामने हिरेन की पहचान के लिए वाजे ने मीटिंग बुलाई

एनआईए द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक सचिन वाजे चाहता था कि हत्या से पहले प्रदीप शर्मा हिरेन को अच्छी तरह से पहचान ले. प्रदीप शर्मा भी चाहता था कि प्लानिंग में कोई गडबड़ी ना हो, इसलिए सारी चीज़ें क्लियर हो जाएं. उसी दिन यानी 2 तारीख की शाम सचिन वाजे एक बार फिर अंधेरी के चकाला इलाके में सुनील माने से मिला. वहां वाजे ने माने को बुकी नरेश गौर  से मिले सिम कार्ड और मोबाइल सेट दिए.

मोबाइल और सिम में मामला उलझ रहा था, फिर हत्या के लिए ऐसे हुई प्लानिंग

प्रदीप शर्मा ने संतोष शेलार से तवेरा गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर मांगा. यह गाड़ी हिरेन की हत्या के लिए इस्तेमाल में लाई जाने वाली थी. सुनील माने को सचिन वाजे द्वारा दिए गए सिमकार्ड में प्रॉब्लम हो रहा था. इसलिए माने 3 मार्च को वाजे से मिलने उसके ऑफिस गया. वहां उसने सचिन वाजे को उसके दिए हुए मोबाइल सेट और सिम कार्ड वापस कर दिए. इसके बाद वाजे उसी दिन माने से चकाला में मिला. वाजे ने माने को एक नया मोबाइल सेट और सिम दिए. वाजे ने माने से कहा कि वे तावडे नाम से हिरेन को फोन करे और उसे ठाणे इलाके में बुलाए. साजिश के तहत यहीं पर हिरेन को संतोष शेलार के हाथ सौंपा जाना था.

4 मार्च की शाम हिरेन को आया कॉल, क्या पता था कि ये मौत का बुलावा है

4 मार्च की शाम सुनील माने ने खुद को मालाड इलाके का एक पुलिस अधिकारी बताते हुए हिरेन को फोन किया. उसने हिरेन को मिलने के लिए बुलाया. हिरेन जब उसके पास पहुंचा तो सुनील माने ने उसे संतोष शेलार को सौंप दिया. संतोष शेलार तीन लोगों (मनीष सोनी, सतीश मोथुकरी और नंद जाधव) के साथ तवेरा गाड़ी में हिरेन का इंतजार कर रहा था. इन सब लोगों ने मिलकर हिरेन की हत्या गाड़ी में ही कर दी और शव को मुंब्रा की खाड़ी में लाकर फेंक दिया.

सिर्फ़ हत्या से नहीं था आराम, बॉडी डिस्पोज़ करने के लिए भी किया इंतज़ाम

एनआईए की चार्ज शीट में लिखा है कि इससे पहले 3 मार्च को वाजे एक बार फिर प्रदीप शर्मा से मिला और उसे पैसे से भरा एक बैग दिया. बैग में सिर्फ 500 रुपयों के ही नोट भरे थे. पैसे लेने के बाद प्रदीप शर्मा ने संतोष शेलार को फोन करके लाल तवेरा गाड़ी का इंतजाम करने को कहा था. हिरेन की हत्या के बाद उनकी बॉडी डिस्पोज़ करने के लिए शर्मा इस गाड़ी का इस्तेमाल करना चाह रहा था.

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