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बिग बॉस मनोरंजन क्षेत्र के चैनल वायाकॉम १८ और एंडेमॉल के पाँच अधिकारियो आपराधिक साजिश रचने मामला में हुआ मामला दर्ज

बिग बॉस मनोरंजन क्षेत्र के चैनल वायाकॉम १८ और एंडेमॉल के पाँच अधिकारियो आपराधिक साजिश रचने मामला में हुआ मामला दर्ज

मुंबई – विशेष रिपोर्ट
काफी मशक्कत के १४ महीने के बाद सत्यजीत सिंह ने कोर्ट के आदेश लेने के बाद बिग बॉस मनोरंजन क्षेत्र के चैनल वायाकॉम १८ और एंडेमॉल के पाँच अधिकारियो आपराधिक साजिश रचने मामला में हुआ मामला दर्ज ।

वही मुंबई पुलिस के विलेपार्ले पुलिस ने धनजय दौड़, अभिनव चोपड़ा , उत्पल दास, अभिषेक रेगे , और दिनेश खैतान जो कि एंडेमॉल इंडिया प्रायवेट लिमिटेड के खिलाफ कोर्ट आदेश के बाद भारतीय दंड कानून सहित धारा ४६७, ४६८,४७१,१२० (बी) और ३४ के तहत ९ अप्रैल के दिन मामला दर्ज कर लिया है। कलर्स चैनल पर चलने वाला चर्चित शो बिग बॉस बिग बॉस चलाने वाले कुछ लोग ही कंपनी से बड़े पैमाने पर धांधली कर रहे हैं। सालाना रिलायंस वायाकॉम १८ को करोड़ो रूपये का नुकसान उनके कंपनी में तैनात कुछ बड़े कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा हैं। एक रुपए का कॉन्ट्रैक्ट दो रुपए में पास कर बड़े पैमाने पर कमीशन खोरों ने बेधड़क धांधली कर रहा है। ऐसा ही एक मामला पिछले साल वीले पार्ले पुलिस स्टेशन में वायकॉम १८के कर्मचारियों पर दर्ज हुआ था लेकिन अभी तक उस मामले में पुलिस ने किसी को भी गिरफ्तार नही किया। मामले का जांच अधिकारी ने बताया कि आरोपी के ओर से हाई कोर्ट में एफआईआर क्रोसिंग का पिटीशन दायर किया गया, जिसका सुनवाई ८ अप्रैल को हैं। हाई कोर्ट ने तब तक के लिए कार्यवाही पर रोक लगा दिया है।


बिग बॉस के नतीजों में फिक्सिंग और उपकरणों की आपूर्ति में धांधली की पोल खोलने वाले वेंडर की जान से मारने की कोशिश किया गया। इस शख्स पर जानलेवा हमला हो चुका है। बिग बॉस बनाने वाली कंपनी ने इसका करार भी कथित रूप से फर्जी दस्तखत बनाकर खत्म कर दिया है। जानकारी के अनुसार विले पार्ले में स्थित वायकॉम १८ के दफ्तर में सत्यजीत सिंह नामक व्यक्ति को बुला कर बिग बॉस के शो चलाने वाले अधिकारियों ने जमकर पिटाई कर दिया और जबरदस्ती उनका कॉन्ट्रैक्ट भी खत्म कर दिया। मनोरंजन टीवी चैनलों में बनने वाले रिएलिटी शोज में “एडिट गुरु” नाम की कंपनी बरसों से उपकरण आपूर्ति का काम करती रही है। इसके मालिक सत्यजीत सिंह पर बीते दिनों गोवा में जानलेवा हमला हुआ। इस हमले में उनका चेहरा एक तरफ से पूरी तरह झुलस गया। सत्यजीत ने पुलिस को बताया कि न सिर्फ उनकी जान को बल्कि उनके पूरे परिवार की जान को खतरा है। पुलिस ने उनकी नहीं सुनी तो वह अपनी फरियाद लेकर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के दफ्तर गए। वहां से भेजे गए निर्देशों पर भी मुंबई पुलिस कोई कार्रवाई नहीं की हैं। ये पूरा मामला दरअसल कलर्स चैनल पर आने वाले मशहूर शो बिग बॉस से जुड़ा है। सत्यजीत ने हाई कोर्ट में जो
पिटिशन अर्जी दाखिल किया उसके आधार पर जानकारी हैं कि इसे बनाने वाली कंपनी एंडेमॉल के कुछ अधिकारी उनसे तबसे खफा है जबसे उन्होंने शो के एलिमिनेशन राउंड्स और विजेताओं के चयन में होने वाली धांधली को कलर्स चैनल के अधिकारियों तक पहुंचाने की कोशिश की। दूसरा यह हैं कि सत्यजीत ने बिग बॉस ( बंगाली और कनाड) में आधे पैसे में उपकरण लगाया था। जो उपकरण पहले कॉट्रेक्टर ने २.१५ करोड़ में लगाया था, जिसका एक बड़ा कमीशन ऊपर के अधिकारियों को मिलता था। जब यह कॉट्रेक्ट सत्यजीत सिंग सिर्फ १ करोड़ में किया तो वायकॉम १८ में बैठे कमीशन खोरों ने उनके फर्जी दस्तखत बनाकर उनका करार खत्म कर दिया गया। जबकि उन्होंने कंपनी के इस भरोसे के बाद ही करीब २० करोड़ रुपये से अधिक के शूटिंग उपकरण खरीदे थे कि उनका करार अगले तीन साल तक चलता रहेगा। करार खत्म करने के कागज पर जिस तारीख में सत्यजीत के हस्ताक्षर बनाए गए, सत्यजीत के मुताबिक उस दिन वह भारत में ही नहीं थे। सत्यजीत अपने साथ हुई इस धोखाधड़ी की शिकायत करने पुलिस के पास गए तो पहले तो पुलिस ने उनकी सुनी नहीं और जब वह मुकदमा दर्ज कराने की गुहार लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट गए तो सुनवाई वाले दिन के पहले वाली रात को पुलिस ने मुकदमा दर्ज तो कर लिया लेकिन फिर कोई कार्रवाई नहीं की। इसी के बाद उन पर जानलेवा हमला भी हुआ। धोखाधड़ी करने, जबरन दफ्तर में बंद करने और कुछ और कागजात पर धमकी देकर दस्तखत कराने के इस मामले में वॉयकॉम 18 के कुछ बड़े अफसरों को भी नामजद किया गया है। इस बारे में जब वॉयकॉम 18 के ग्रुप सीईओ सुधांशु वत्स से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उन्होंने संदेश का कोई जवाब नहीं दिया।
वीले पार्ले पुलिस स्टेशन डिवीज़न परिमंडल जोन के डीसीपी अनिल कुंभारे ने कहा कि पूरा मामला हाइकोर्ट में है और आगे मुझे कुछ नहीं पता।
फिलहाल विले पार्ले पुलिस ने इस मामले में कुल ९ लोगो पर दिनांक २८ नवंबर २०१७ एफआईआर दर्ज कराया गया था जिन पर आईपीसी की धारा ४२०,३४२,५०६, और ३४ क तहत मामला दर्ज कराया गया था।

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