55 (पचपन) से बचपन की तरफ़।
मोंटेरिया विलेज रिसोर्ट का पहेला मोंटेरिया क्रिएटर सर्कल 2026 हुआ संपन्न।

संवाददाता शोएब म्यानुंर मुंबई
मुंबई से सटे कर्जत के पास खलापुर मुंबई पुणे ओल्ड हाईवे पर मोंटेरिया विलेज रिसोर्ट। की तरफ़ से तारीख 28 फरवरी 2026 को पहेला मोंटेरिया क्रिएटर सर्कल 2026 का एक अनोखा इवेंट शो संपन्न हुआ।
इस इवेंट का मकसद ये था की जो लोग मोंटेरिया विलेज रिसोर्ट में आए थे वो लोग एक रील बनाकर मोंटेरिया विलेज रिसोर्ट की जानकारी लोगों तक सोशियल मिडिया प्लेटफार्म के जरिए पहुंचा ने का प्रयास करें वैसे देखा जाए तो पब्लिसिटी और एडवर्टाइजमेंट का लाखों रुपया खर्च हो जाता है लेकिन मोंटेरीया विलेज रिसोर्ट ने पहेली बार ये प्रोग्राम का अनोखा कार्यक्रम किया जिसमें तकरीबन 700 से अधिक लोगों ने पार्टीसिपेट किया। जिसमें अतीथी गण मान्य लोगों की उपस्थिति में पार्टीसिपेट करने वाले 11 ग्यारह लोगों को सर्टिफिकेट दिया गया और चार पार्टीसिपेट को नगद पुरस्कार और सर्टिफिकेट देकर विशेष सम्मान किया गया।
जिसमें तीसरे नंबर पर दो पार्टीसिपेट मानसी वालंज, और सुप्रिया चौधरी को 51 हजार, दुसरे नंबर पर जानवी प्रमोद जोरी को 1 लाख 1 हजार, और प्रथम नंबर पर स्वप्निल विलास परब को 2 लाख 51 हजार का नगद पुरस्कार दिया गया।
मोंटेरिया विलेज रिसोर्ट के फाउंडर गोविंद वाघाणी ने बताया कि मैं वैसे तो गुजरात राज्य के भावनगर जिले के गारियाधार गांव का रहेवासी हुं और अक्सर छुट्टी पर में अपने परिवार के साथ गांव जाता रहेता था शहेर की भागदौड़ वाली लाईफ से शांति और सुकून के लिए गांव में जाकर छुट्टी मनाया करता था लेकिन आज के इस टेक्नोलॉजी के दौर में अब पहले जैसा गांव नहीं रहा बदलते वक्त के साथ शहर ब शहर गांव ब गांव भी काफी बदल चुके हैं। लेकिन अब गांव में पहेले जैसा सुकुन नहीं रहा वो पुरानी यादों को देखते हुए मैंने थे तय किया की मैं तो गांव की याद ताज़ा करुंगा लेकिन मेरे साथ जनता भी उन पुरानी यादों को ताज़ा करती रहे और इसी लिए मैंने साल 2019 में 36 एकड़ जमीन में ये मोंटेरिया विलेज रिसोर्ट बनाया मेरा मकसद पैसा कमाना नहीं है सिर्फ लोगों को सुकुन और शांति भरा माहौल मिले और लोग भी पुरानी यादों को ताज़ा करें और आने वाली नस्लों को ये बताए की हमारा बचपन कैसा था आज मैं पचपन का हो गया हुं इस लिए “पचपन से बचपन की तरफ़” पुरानी यादों को जिंदा रखने के मकसद से ये रिसोर्ट बनाया है। और इस रिसोर्ट में एक गांव बसाया है। उस दौर में गांव में क्या हुआ करता था वो पुरानी बैलगाड़ी, खेतों के लिए ट्रेक्टर, ऑपन रिक्षा, स्कुटर, रेलवे स्टेशन, गांव के चौराहे पर बसने वाली दुकानें, पुरानी टीवी, टेलिफोन, साईकील, जैसी कई असली चिजों को इस रिसोर्ट में रखा रियलिटी में बसाया है ताकी इक्कीसवीं सदी के नई पीढ़ी को पहले का पुराना गांव कैसा होता था उसकी जानकारी मिल सके। साथ ही साथ यहां कुछ नई टेक्नोलॉजी में स्विमिंग पूल, बॉटींग, गेम्स झोन रहेने के लिए अलग अलग प्रकार के रुम, कॉन्फ्रेंस हॉल, पार्टी लॉस जैसी कई सुविधाएं देने का प्रयास किया है और आगे लोग मुझे जिस तरह सुझाव देंगे में उसे भी सामील करुंगा।
गोविंद वाघाणी ने आगे बताया की मेरा गांव गुजरात के गारियाधार में है लेकिन मैंने यहां का नाम मोंटेरिया क्यों रखा क्योंकि यहां आस पास में चारों तरफ़ माउंटैन एरिया ज्यादा है। और इस लिये यहां का नाम “मोंटेरिया विलेज” रख दिया। लोग आते हैं और पुराने गांव का मझा लेते हैं।
आज के इवेंट के लिए मोंटेरिया विलेज रिसोर्ट की पुरी टीम जीस में डायरेक्ट, मेनेजमेंट, स्टाफ, ने तन-मन से इसे सफलतापूर्वक सफ़ल बनाया है।
