आनंद दिघे कई लोगों के सपने में आए और पूछे मुंबई डूबी… एकनाथ कहां है?.. संजय राऊत का शिंदे और भाजपा पर तमाचा.

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आनंद दिघे कई लोगों के सपने में आए और पूछे मुंबई डूबी… एकनाथ कहां है?.. संजय राऊत का शिंदे और भाजपा पर तमाचा……….

मुंबई..मुंबई में भारी बारिश के चलते सोमवार को जो जलप्रलय आया, उसकी जिम्मेदारी नगरविकास मंत्री एकनाथ शिंदे की है। मनपा भी सरकार के ही नियंत्रण में है इसलिए सोमवार को कई लोगों के सपने में दिवंगत शिवसेना नेता आनंद दिघे आए और उन्होंने पूछा, एकनाथ कहां है? कहां गया वो एकनाथ? मुंबई और ठाणे डूब रहे हैं, एकनाथ कहां है? उस समय एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के गद्दारों और अमित शाह की चापलूसी कर रहे थे। इस तरह के तीखे शाब्दिक बाणों से शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता व सांसद संजय राऊत ने शिंदे और भाजपा पर जोरदार तमाचा मारा है।

संजय राऊत ने कहा कि मुंबई में बारिश के कारण मेट्रो के भूमिगत स्टेशन पानी में डूब गए थे। इसके लिए भाजपा और शिंदे गुट की भ्रष्टाचार की राजनीति ही जिम्मेदार है। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रेय लेने की होड़ में जल्दबाजी से अधूरे कामों का उद्घाटन कर दिया जाता है और जब वे ढहते हैं तो विपक्ष पर ठीकरा फोड़ दिया जाता है। पहली ही बारिश में मेट्रो पानी में डूब गई। इसके लिए संबंधित लोगों का इस्तीफा लिया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि देश में कुछ भी होता है तो भाजपा वाले नेहरू, इंदिरा गांधी और मनमोहन सिंह का नाम लेते हैं। पिछले साढ़े दस साल से ये क्या कर रहे हैं? देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और रक्षा मंत्री क्या कर रहे हैं? इस तरह का सवाल भी उन्होंने किया।

सेठ जी तय न करें मुंबई और महाराष्ट्र का भविष्य!

भारतीय जनता पार्टी के नेता शेयर बाजार के दलाल हैं। उन्हें मुंबई को जुए का अड्डा बनाना है। भाजपा व्यापारियों और सेठ जी की पार्टी है और सेठ जी मुंबई और महाराष्ट्र का भविष्य तय न करें। इस तरह का जोरदार हमला शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता व सांसद संजय राऊत ने कल किया। गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि हमने शिवसेना को बालासाहेब ठाकरे के विचारों को मानने वालों के हाथों में सौंपा है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राऊत ने कल मीडिया से बात करते हुए उनकी जमकर खबर लीr। उन्होंने कहा कि अमित शाह देश पर थोपे गए गृहमंत्री हैं। उन्हें हमें शिवसेनाप्रमुख के विचार सिखाने की जरूरत नहीं है। अगर आज बालासाहेब जीवित होते तो जिन नरेंद्र मोदी और अमित शाह को उन्होंने तड़ीपारी और मर्डर केस से बचाया था, उसके लिए उन्हें पछतावा होता

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