आपके आंसू मगरमच्छ जैसे…. कुत्ता माफिया कहने वाली महिला को नहीं मिली माफी, जानें क्या हुआ?………

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मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट ने अदालत की अवमानना करने के लिए एक महिला को माफी देने से इंकार कर दिया है। हाई कोर्ट ने आपराधिक अवमानना के आरोप में दोषी ठहराया। कोर्ट ने महिला को एक सप्ताह कारावास की सजा सुनाई। बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने कहा कि आपकी माफी मगरमच्छ के आंसू की तरह है। माफी का आग्रह स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने 2000 रुपये का जुर्माना लगाते हुए सात दिन जेल की सजा सुनाई, हालांकि कोर्ट ने बाद में वकील के आग्रह पर महिला की जेल की सजा को 10 दिन के निलंबित कर दिया। नवी मुंबई स्थित सीवुड्स एस्टेट सोसायटी की प्रबंध समिति के एक सदस्य को हाईकोर्ट की आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराया। सोसाइटी में रहने वाले लीला वर्मा कोर्ट में एक याचिका दी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि सोसायटी की कार्रवाई ने आवारा जानवरों को खिलाने के उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है। सोसाइटी की तरफ याचिका लंबित रहने के दौरान ही एक सर्कुलर जारी किया गया था। इसे कॉलोनी के 1,500 निवासियों के बीच वितरित किया गया था। इसमें उच्च न्यायपालिका के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए थे। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को शामिल करते हुए कुत्ते माफिया के आरोप शामिल थे। कोर्ट ने सर्कुलर में कही गई बातों को न्यायिक कार्यवाही पर सीधा हमला माना। नहीं मिल पाई राहत

सोसायटी की सांस्कृतिक निदेशक विनीता श्रीनंदन कोर्ट की सख्ती के बाद खुद को कार्यों से खुद को अलग कर लिया था। उन्होंने दावा किया था कि उन्हें सर्कुलर के बारे में कोई जानकारी नहीं है। श्रीनंदन ने अपने हलफनामे में कहा था कि आवारा कुत्तों के हमलों को लेकर बढ़ते तनाव के कारण उन्होंने भावनात्मक दबाव में आकर ऐसा किया। उन्होंने कुत्ता माफिया जैसी टिप्प्णियों को त्रुटि बताया था। इसके साथ क्षमा की गुहार लगाई। अदालत ने पाया कि उसकी माफी खोखली है और उसमें पश्चाताप का अभाव है। अदालत ने कहा कि ऐसे बयान केवल हलफनामे के लिए इस्तेमाल किए गए कागज के लिए हैं।

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