अलीगढ़ में सांप्रदायिक दंगा भड़काने की साजिश बेनकाब — मंदिरों पर ‘आई लव मोहम्मद’ लिखने वाले चार हिंदू आरोपी गिरफ्तार, मास्टरमाइंड राहुल फरार

संवाददाता: फरीयाद अली, उत्तर प्रदेश
अलीगढ़। जिले को आग के हवाले करने की एक खतरनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है। लोधा थाना क्षेत्र के बुलकगढ़ी और भगवानपुर में मंदिरों की दीवारों पर स्प्रे पेंट से ‘आई लव मोहम्मद’ लिखकर सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वाले चार युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि ये सभी आरोपी हिंदू समुदाय से हैं, जिनकी नीयत समुदाय विशेष को फंसाकर दंगा भड़काने की थी।
गिरफ्तार आरोपियों में दिलीप शर्मा, आकाश सारस्वत, अभिषेक सारस्वत और जीशांत सिंह शामिल हैं। जबकि मुख्य आरोपी राहुल अभी फरार है और उसकी तलाश जारी है।
एसएसपी नीरज कुमार जादौन ने साफ कहा कि यह सोची-समझी साजिश थी, जिसका मकसद शहर की शांति को छलनी करना था। पहले इस घटना में पुलिस ने मौलवी मुस्तकीम, गुल मोहम्मद, सुलेमान, सोनू, अल्लाबक्श, हसन, हामिद और यूसुफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। लेकिन जांच में सच सामने आते ही पुलिस ने झूठे मुकदमे को निरस्त करने का निर्णय लिया।
जमीन विवाद को हथियार बनाकर सांप्रदायिक हिंसा भड़काने की यह खतरनाक कोशिश एक तरफ जहां समाज को शर्मसार करती है, वहीं यह सवाल भी खड़ा करती है कि कुछ लोग अपनी निजी लड़ाई के लिए पूरे शहर को आग में झोंकने में भी नहीं हिचकते।
एसएसपी ने बताया कि आरोपियों ने अपने विरोधी पक्ष को फंसाने और माहौल गर्माने के लिए यह षड्यंत्र रचा था। जमीन हड़पने की नीयत से पूरे समुदाय को बदनाम करने की यह खतरनाक चाल अंतिम समय में विफल रही।
पुलिस और SOG की संयुक्त कार्रवाई ने न सिर्फ बड़ी साजिश को नाकाम किया बल्कि यह भी साबित कर दिया कि कानून से ऊपर कोई नहीं।
इस घटना ने प्रशासन की चौकसी और सतर्कता पर भी बड़ा सवाल उठाया — अगर समय पर जांच न होती तो शहर सुलग सकता था।
अब जनता का यही सवाल है — क्या ऐसे समाज विरोधी तत्वों को सिर्फ जेल काफी है या इनके खिलाफ उदाहरणात्मक कठोर कार्रवाई होनी चाहिए?
