भीवंडी महानगरपालिका : जनता के साथ खिलवाड़ या नवीन जन सुरक्षा योजना?

ठाणे से भीवंडी जाने वाला वह प्रमुख मार्ग, जो सीधे महानगरपालिका के कार्यालय तक जाता है, अब जनता के लिए एक खतरनाक खेल-मैदान बन चुका है। रास्ते में लगे ढक्कनों में से लगभग 90% ऐसे खुले पड़े हैं, जैसे कि नगर निगम अधिकारी खुद आम नागरिकों को चुनौती दे रहे हों – ‘आगे बढ़ो, पर संभल कर!’ यहाँ साफ नजर आता है कि भीवंडी निजामपुर पालिका आयुक्त और उनके अधिकारीजन ने सुरक्षा उपायों की जगह नया प्रयोग शुरू कर दिया है। जहाँ अन्य नगरपालिकाएं सड़क सुधार, सफाई और ढक्कनों की मरम्मत में तत्पर रहती हैं, वहीं भीवंडी महानगरपालिका ने जनता को एडवेंचर ट्रैक पर भेजना शुरू कर दिया है। लगता है, ये अधिकारीजन मानते हैं कि दुर्घटना ही जनता को जागरूक करने का सबसे असरदार तरीका है। खुला ढक्कन अब कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि “लोक जन सेवा की पराकाष्ठा” बन चुका है। जनता को सड़क पर चलते हुए सस्पेंस थ्रिल का आनंद लेने को मिलता है – अगला कदम कहां गड्ढे में समा जाएगा, यह कोई नहीं जानता। शायद यही उनकी ‘स्मार्ट सिटी’ का नया संस्करण है – स्मार्ट ढक्कन, स्मार्ट हादसे।
