बहराइच: चित्तौरा ब्लॉक में मनरेगा घोटाले का बड़ा खुलासा, फर्जी हाज़िरी, JCB से काम और पत्रकारों पर हमला—क्या कार्रवाई करेगा प्रशासन?

बहराइच: चित्तौरा ब्लॉक में मनरेगा घोटाले का बड़ा खुलासा, फर्जी हाज़िरी, JCB से काम और पत्रकारों पर हमला—क्या कार्रवाई करेगा प्रशासन?
संवाददाता फरियाद अली,
बहराइच। केंद्र सरकार की सबसे संवेदनशील सामाजिक सुरक्षा योजना मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को सम्मानजनक मजदूरी देना है। लेकिन चित्तौरा ब्लॉक के ग्राम पंचायत नगर में यह योजना विकास नहीं, बल्कि खुलेआम लूट का ठेका बन चुकी है। जिस योजना का हक़ देश के सबसे गरीब लोगों को मिलना चाहिए, उस पर कुछ प्रभावशाली लोगों ने कब्ज़ा कर रखा है और कागज़ी काम दिखाकर करोड़ों की सरकारी धनराशि डकारने का खेल 14 दिनों से बिना रुकावट चलता रहा।
पोर्टल पर 75 मजदूर रोज़, ज़मीन पर सिर्फ सन्नाटा
ग्राम पंचायत नगर में मनरेगा के तहत दो प्रमुख कार्य दर्ज है
1. तालाब से गुड़ी के खेत तक चकरोड़ पर मिट्टी पटाई
2. रामजी के खेत के पास तालाब निर्माण
कागज़ों में यह दोनों कार्य जोर–शोर से चल रहे हैं। पोर्टल पर हर दिन 75 मजदूरों की हाज़िरी लगी हुई दिखती है। लेकिन मौके पर न मजदूर मिले, न औज़ार, न कोई गतिविधि। ग्रामीणों ने बताया कि मजदूरों के नाम पर जो धनराशि निकाली जा रही है, उसका वास्तविक कार्य JCB मशीन से करवाया जा रहा है। मनरेगा में मशीन लगाना कानूनन अपराध है, बावजूद इसके यह अवैध गतिविधि खुलेआम संचालित की जा रही है।
जब ग्रामीणों ने यह पूरा मामला हमारी टीम को बताया, तो संवाददाता मौके पर पहुंचे और कैमरे में तमाम अनियमितताओं को रिकॉर्ड किया। लेकिन वापसी के दौरान भ्रष्टाचार का असली चेहरा सामने आ गया।
रास्ते में प्रधान और उसके सहयोगियों ने पत्रकारों की गाड़ी रोक ली। चाबी छीनी, हेलमेट छीन लिया, मोबाइल जब्त कर लिया और रिकॉर्ड किए गए सबूत जबरन डिलीट करा दिए। धमकी दी गई— “लेटरिंग में बंद कर देंगे… करंट लगा देंगे… मार देंगे।” यह सिर्फ बदतमीजी नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रीढ़ पर सीधा प्रहार था।
सवालो के घेरे में सचिव और रोजगार सेवक
मजदूरों की हाज़िरी 14 दिनों से पोर्टल पर भरी जा रही थी। दोनों स्थानों पर मशीन से तालाब खुद रहा था और चकरोड़ पर मशीन से मिट्टी पटाई चल रही थी। फिर भी सचिव और रोजगार सेवक मौके पर मौजूद नहीं थे।
क्या उन्हें इस फर्जीवाड़े की जानकारी नहीं थी?
अगर नहीं थी—तो यह घोर लापरवाही है।
अगर थी—तो यह सीधी मिलीभगत है।
मनरेगा में बिना निरीक्षण किसी भी कार्य को चलाना असंभव है, फिर यह घोटाला कई दिनों तक कैसे जारी रहा?
ग्रामीण मजदूर काम के लिए परेशान घूम रहे हैं, लेकिन उनकी जगह माॅस्टर रोल में उनके नाम से भुगतान निकाला जा रहा है। यह सिर्फ घोटाला नहीं, बल्कि गरीबों की रोज़ी पर सीधी–सीधी डकैती है। सरकारी खजाने की लूट और मजदूरों के अधिकारों की हत्या एक साथ की जा रही है।
पत्रकारों पर हमला हुआ। फर्जी हाज़िरी भरी गई। मनरेगा में मशीन चली। सच को दबाने की कोशिश की गई।
अब प्रश्न यह नहीं कि जांच होगी या नहीं…
प्रश्न यह है कि बहराइच प्रशासन किसके साथ खड़ा होगा?
सच लाने वाले पत्रकारों के साथ…या
फर्जीवाड़ा करने वाले माफिया प्रधान और उसके गिरोह के साथ?
