कौन बनेगा बीएमसी का नया मेयर? इस दिन हो सकता है फाइनल, क्या उद्धव की शिवसेना करेगी ‘खेला

Shoaib Miyamoor

कौन बनेगा बीएमसी का नया मेयर? इस दिन हो सकता है फाइनल, क्या उद्धव की शिवसेना करेगी ‘खेला’………

सूत्रों के अनुसार, शहरी विकास विभाग अगले हफ्ते एक लॉटरी निकालेगा। इस लॉटरी से तय होगा कि मेयर का पद किस आरक्षित श्रेणी के लिए होगा, जैसे सामान्य, महिला या अन्य आरक्षित वर्ग……….

 

मुंबई: बीएमसी के नए मेयर का चुनाव निगम सदन में पार्षदों के मतदान के जरिए किया जाएगा। नगर प्रशासन द्वारा बुलाई जाने वाली विशेष बैठक में यह चुनाव होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, मेयर और उपमहापौर का चुनाव 28 जनवरी 2026 को कराया जा सकता है। नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि मेयर पद के लिए सभी निर्वाचित पार्षद मतदान करेंगे और जिसे सबसे अधिक वोट मिलेंगे, वही मेयर चुना जाएगा। यह जरूरी नहीं है कि सबसे ज्यादा पार्षदों वाली पार्टी का उम्मीदवार ही मेयर बने, लेकिन बीते वर्षों के अनुभव बताते हैं कि आमतौर पर बहुमत या मजबूत गठबंधन वाली पार्टी इस पद पर काबिज होती रही है।

इससे पहले बीएमसी की मेयर शिवसेना की किशोरी पेडणेकर थीं, जो इस बार भी चुनाव जीतकर निगम में पहुंची हैं। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए इस बार मेयर चुनाव को लेकर खासी दिलचस्पी बनी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, शहरी विकास विभाग (यूडीडी) अगले सप्ताह मेयर पद के आरक्षण को लेकर लॉटरी निकालेगा। इसमें यह तय होगा कि मेयर पद सामान्य वर्ग, महिला या किसी आरक्षित श्रेणी के लिए होगा। आरक्षण की घोषणा के बाद पात्र पार्षद नामांकन दाखिल करेंगे और उसके कुछ दिनों बाद मेयर का चुनाव कराया जाएगा। इस तरह मेयर चुनाव जनवरी के अंतिम सप्ताह में होना तय माना जा रहा है।

मेयर चुनाव की प्रक्रिया के तहत पहले आरक्षण तय किया जाता है, फिर विशेष बैठक में सभी पार्षद मतदान करते हैं। साधारण बहुमत हासिल करने वाला उम्मीदवार मेयर और उपमेयर घोषित किया जाता है। यदि किसी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं होता, तो गठबंधन और चुनाव के बाद की राजनीतिक बातचीत निर्णायक भूमिका निभाती है। इस बार मेयर चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार 227 निर्वाचित पार्षदों के साथ 10 नामांकित पार्षद भी होंगे। मार्च 2023 में मुंबई नगर निगम अधिनियम में संशोधन कर नामांकित पार्षदों की संख्या पांच से बढ़ाकर दस कर दी गई थी। माना जा रहा है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते बीजेपी को नामांकित पार्षदों में बड़ा हिस्सा मिल सकता है, जिससे मेयर चुनाव के नतीजों पर असर पड़ सकता है।

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