नालों की सफाई का मलबा पटरियों पर………..

admin

मुंबई…मध्य रेलवे ने मानसून को ध्यान में रखते हुए रेलवे ट्रैक के पास के नालों और आसपास के क्षेत्रों की सफाई तो कर दी है, लेकिन कई जगहों पर नाले से निकाली गई गाद और कचरा वहीं किनारे पड़ा हुआ है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या नालों की सफाई का उद्देश्य वास्तव में पूरा होगा? मध्य रेलवे के सायन, कुर्ला, जीटीबी नगर, वडाला, चूनाभट्टी, गोवंडी स्टेशनों के बीच हर साल भारी बारिश के कारण जलभराव होता है। इसे ध्यान में रखते हुए नाले, रेलवे ट्रैक और आसपास के क्षेत्रों से गाद, कीचड़ और कचरा हटाने का काम तेजी से चल रहा है। इसके लिए स्पेशल ट्रेन, जेसीबी, पोकलेन मशीन और सैकड़ों कर्मचारियों को तैनात किया गया है, लेकिन नालों से निकाली गई गाद और कचरा नालों के पास ही छोड़ने से वह फिर से नाले में जाने का खतरा बना रहता है।

खास तौर पर कुर्ला-सायन, सायन- माटुंगा, वडाला-जीटीबी नगर और चूनाभट्टी क्षेत्रों में यह समस्या अधिक गंभीर है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या नालों की सफाई के बावजूद जलभराव की समस्या टलेगी? इसके अलावा, रेलवे ट्रैक के पास की बस्तियों से लोग फिर से नालों और ट्रैकों पर कचरा फेंक रहे हैं, जिससे सफाई के सारे प्रयास बेकार होने की आशंका है। इस बीच, मानसून में रेल सेवा बाधित न हो इसके लिए मध्य रेलवे ने विशेष उपाय योजनाएं बनाई है। हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में ३३ संवेदनशील स्थानों की सूची तैयार की गई है। इन स्थानों पर कुल ११२ पंप लगाने की योजना है और ३१ मई २०२५ तक सभी पूर्व-मानसून कार्य पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, मनपा ने चार संवेदनशील बाढ़ प्रवण क्षेत्रों में प्रमुख पंपिंग केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई है और निचले इलाकों में भारी बारिश के दौरान रेलवे ट्रैक पर पानी जमा न हो, इसके लिए चार फ्लडगेट भी लगाए जाएंगे।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *