सायली की जमीन ₹2.16 करोड़ में बेचने का दावा; एक ही दिन ₹1.83 करोड़ अन्य खाते में ट्रांसफर होने का आरोप
सिलवासा। दादरा एवं नगर हवेली के सिलवासा क्षेत्र में आदिवासी किसानों की जमीन से जुड़े कथित लेन-देन और करोड़ों रुपये के बैंक ट्रांजैक्शन को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। अथोला-जंतियापाड़ा निवासी चैतुबेन मोहजीभाई वाडिया सहित अन्य सह-अधिकारियों ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर मामले की उच्चस्तरीय जांच, बैंक खातों के फॉरेंसिक ऑडिट और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, वर्ष 1986 में भूमि सुधार योजना के तहत आवंटित सायली की सर्वे नंबर 402 की करीब 65 आर जमीन को बाद में एनए में परिवर्तित किया गया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जमीन के लेन-देन में उनकी अशिक्षा और कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी का फायदा उठाया गया।
शिकायत में बताया गया है कि रुदाना की सर्वे नंबर 39/1 जमीन खरीदने के नाम पर 20 जनवरी 2025 को फेडरल बैंक के एक खाते में विशाल किशोरभाई पांचाल और हार्दिक पांचाल की ओर से ₹8.82-₹8.82 लाख, यानी कुल ₹17.65 लाख जमा हुए। यह रकम संबंधित जमीन के भुगतान में जाने का दावा किया गया है, लेकिन शिकायतकर्ताओं के अनुसार उन्हें जमीन का वास्तविक कब्जा नहीं मिला।
इसके बाद 11 अगस्त 2025 की बिक्री विलेख के जरिए सायली की जमीन करीब ₹2.16 करोड़ में बेचे जाने का दावा शिकायत में किया गया है। शिकायत के अनुसार 13 अगस्त को संबंधित बैंक खाते में अलग-अलग आरटीजीएस के जरिए कुल ₹2.05 करोड़ जमा हुए। इसी दिन खाते से ₹1.83 करोड़ की रकम किशन बाबुभाई खरपाड़िया को ट्रांसफर किए जाने का आरोप है। इसके अलावा स्टांप ड्यूटी सहित अन्य मदों में भी रकम डेबिट हुई।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि उनसे खाली चेक, बैंक दस्तावेज और अन्य कागजात पर हस्ताक्षर अथवा अंगूठे के निशान भी लिए गए। उन्होंने पूरे बैंक मनी ट्रेल, केवाईसी, चेक रिकॉर्ड, आरटीजीएस विवरण और अंतिम लाभार्थियों की जांच की मांग की है।
शिकायत में विशाल किशोरभाई पांचाल, हार्दिक पांचाल और किशन बाबुभाई खरपाड़िया सहित अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने तथा जमीन के आगे हस्तांतरण और म्यूटेशन पर रोक लगाने की मांग भी की गई है। शिकायतकर्ताओं ने जमीन का कब्जा वापस दिलाने अथवा कानूनन उपलब्ध होने पर रकम व मुआवजा दिलाने की मांग रखी है।
हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच, बैंक रिकॉर्ड और राजस्व दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।


Loading comments...