रिपोर्ट फरियाद अली
"उत्तर प्रदेश मे अपने स्मार्ट कार्ड ड्राइविंग लाइसेंस को इस पॉकेट के अलावा किसी अन्य पॉकेट में न रखें। किसी अन्य पॉकेट में यदि आप रखते हैं, तो इसे नुकसान हो सकता है।"
क्या आपने कभी सोचा था कि एक आधुनिक, मजबूत और दस साल तक टिकने वाले प्लास्टिक के स्मार्ट कार्ड को सुरक्षित रखने के लिए विभाग आपको जो 'सुरक्षा कवच' थमाएगा, वह खुद चंद दिनों में दम तोड़ देगा? जी हाँ, आरटीओ (RTO) से ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण कराकर घर लौटे एक जागरूक उपभोक्ता ने जब लिफाफा खोला, तो उनका माथा ठनक गया। विभाग ने लाइसेंस रखने के लिए जो पॉकेट दी है, वह किसी हाई-टेक प्लास्टिक की नहीं, बल्कि एक साधारण से कच्चे कागज़ का पाउच है—वह भी बिना किसी लेमिनेशन के!
सवाल यह है कि बेवकूफ कौन है उपभोक्ता या व्यवस्था?
जरा इस हास्यास्पद विरोधाभास पर गौर फरमाइश कीजिए:
दलील विभाग की: 10 साल या उससे अधिक समय तक चलने वाला सख्त प्लास्टिक कार्ड, कागज़ के इस पतले से लिफाफे के बाहर जाते ही 'असुरक्षित' हो जाएगा!
हकीकत कागज़ की: जिस कागज़ के लिफाफे में उस महंगे कार्ड को हिफाजत से रखने की हिदायत दी जा रही है, वह जेब में रखते ही पसीने से गल जाए या बारिश की एक बूंद से तहस-नहस हो जाए, तो इसमें किसकी गलती मानी जाएगी?
सोशल मीडिया से लेकर आम चाय की ट्यूबल तक, अब जनता पूछ रही है कि क्या सरकारी तंत्र उपभोक्ताओं को वाकई इतना नासमझ समझता है? एक मजबूत प्लास्टिक कार्ड को बचाने के लिए ऐसा नायाब और 'कमजोर' कागजी लिफाफा थमाया जाना सीधे-सीधे व्यवस्था के खोखलेपन पर सवालिया निशान लगाता है। जनता का सीधा कहना है— "जब सुरक्षा के नाम पर ऐसा मजाक ही करना है, तो इस कागजी झंझट को देने से बेहतर था कि देते ही नहीं!"
क्या आपके साथ भी सरकारी दफ्तरों में ऐसे ही किसी 'अजीबोगरीब' नियम का पाला पड़ा है? हमें कमेंट या मैसेज करके जरूर बताएं!


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