बहराइच के गोबरहा में सड़क निर्माण में खुली लूट, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, PWD बैकफुट पर; एक सप्ताह की मोहलत पर टला बवाल
ब्यूरो रिपोर्ट फरियाद अली
बहराइच जनपद के थाना रानीपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत गोबरहा में सरकारी बजट को ठिकाने लगाने और घटिया सड़क निर्माण के खेल के खिलाफ ग्रामीणों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। सड़क निर्माण के नाम पर चल रही खुली धांधली और भ्रष्टाचार के विरोध में आक्रोशित ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर जोरदार धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया और संबंधित महकमे के होश उड़ा दिए। ग्रामीणों का सीधा और सख्त आरोप है कि जनता की गाढ़ी कमाई से बनने वाली सड़कों में कमीशनखोरी की भेंट चढ़ाकर मानक विहीन सामग्री झोंकी जा रही है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हंगामे और तीखे विरोध के बीच पीडब्ल्यूडी के अवर अभियंता (JE) नीरज वर्मा को खुद मौके पर पहुंचना पड़ा, जहां ग्रामीणों के तीखे सवालों और विरोध के आगे विभागीय तंत्र पूरी तरह बैकफुट पर दिखा। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए अवर अभियंता ने सड़क का पुनः मानक अनुरूप निर्माण कराने के लिए ग्रामीणों से एक सप्ताह की मोहलत मांगी और गुणवत्ता से खिलवाड़ करने वाले लापरवाह ठेकेदारों के खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई का खुला आश्वासन दिया। इसके साथ ही खंड विकास अधिकारी (BDO) हुजूरपुर द्वारा भी निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया, जिसके बाद ग्रामीणों ने इस चेतावनी के साथ धरना स्थगित किया कि तय समय में काम दुरुस्त नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र होगा।
प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए रानीपुर थाना प्रभारी हरेंद्र नाथ राय भारी पुलिस बल के साथ मौके पर डटे रहे। पुलिस टीम में वरिष्ठ उपनिरीक्षक रामकेश, एसआई कृष्ण कुमार सिंह, दिनेश यादव, योगेंद्र यादव, विनोद राव, कैलाश चंद्र और सौरभ मिश्र पूरी मुस्तैदी से तैनात रहे। इस जनांदोलन में मनोज कुमार पुष्कर 'भगत सिंह', रामचंद्र भास्कर, आसिफ सिद्दीकी और अशोक कुमार पुष्कर के नेतृत्व में शिवकुमार, राजकिशोर, मदन गौतम, जितेंद्र आर्य, सुरेश, फरमान सिद्दीकी, नियाज अली, शमसुद्दीन अंसारी समेत सैकड़ों ग्रामीण मजबूती से डटे रहे। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या PWD का यह आश्वासन सिर्फ बवाल टालने का पैंतरा था या वाकई एक सप्ताह में भ्रष्ट ठेकेदारों पर नकेल कसकर गुणवत्तापूर्ण निर्माण जमीन पर उतरेगा? ग्रामीणों की निगाहें अब पूरी तरह अधिकारियों के वादे पर टिकी हैं।

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