उ. प्र. बहराइच जिले के हरदी थाना अंतर्गत सिकंदरपुर गांव में आज से 28 साल पहले यानी 19 सितंबर 1998 की रात को एक सनसनीखेज हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। पुरानी रंजिश के चलते आरोपी अंगद शुक्ल उर्फ करुणेश ने धारदार हथियार (फरसे) से हमला कर महानंद मिश्र की निर्मम हत्या कर दी थी।
घटना के संबंध में मृतक के भाई राजितराम ने हरदी थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। वादी के अनुसार, यह पूरी घटना प्रतिशोध (बदले की भावना) का परिणाम थी। दरअसल, वर्ष 1990 में मृतक महानंद मिश्र ने आरोपी के भाई की हत्या कर दी थी, जिसका बदला लेने के लिए आरोपी ने इस खूनी वारदात को अंजाम दिया।
कानूनी प्रक्रिया और सजा:
हत्या की इस घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज किया, आरोपी को गिरफ्तार किया और साक्ष्य जुटाकर अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया।
विचारण (ट्रायल) के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता (अपराध) प्रमोद कुमार सिंह ने मजबूत पैरवी की और अदालत के सामने 7 गवाहों के बयान दर्ज कराए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद, अपर सत्र न्यायाधीश पंचम सुनील प्रसाद ने आरोपी अंगद शुक्ल उर्फ करुणेश को दोषी करार दिया।
अन्यायालय ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और साथ ही 1,02,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत के आदेशानुसार, यदि दोषी जुर्माना अदा नहीं करता है, तो उसे 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। फैसले के तुरंत बाद दोषी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

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