गणेशोत्सव के दौरान मंडल के प्रसाद वितरण कक्ष और भोजन व्यवस्था (अन्नछत्र) से भारी मात्रा में खाद्य व जैविक कचरा निकलता है। इस गीले कचरे को 'बायोमिथेनेशन' (Biomethanation) प्रक्रिया के जरिए बिजली में बदला जाएगा।80 मीट्रिक टन कचरे पर प्रक्रिया: उत्सव के 11 दिनों के भीतर करीब 80 मीट्रिक टन गीले कचरे को रीसायकल करने का लक्ष्य रखा गया है। अनुमान है कि यहां हर दिन लगभग 8 से 10 मीट्रिक टन जैविक कचरा जमा होता है।7,744 यूनिट रीन्यूएबल एनर्जी: इस पूरे प्रोजेक्ट के माध्यम से करीब 7 हजार 744 यूनिट नवीकरणीय बिजली (Renewable Energy) पैदा करने की योजना है। हालांकि, वास्तविक बिजली उत्पादन कचरे के पृथक्करण (separation) और उसकी गुणवत्ता पर निर्भर करेगा।चार अस्पतालों में जाएगी बिजली: जमा किए गए कचरे को विशेष वाहनों द्वारा नगर पालिका के नायर अस्पताल, कस्तूरबा अस्पताल, जीटीबी अस्पताल और सायन (शीव) अस्पताल स्थित बायोमिथेनेशन प्लांट्स में भेजा जाएगा। इन प्लांट्स की क्षमता 2 मीट्रिक टन प्रतिदिन है।पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में यह एक बेहद सराहनीय और अभिनव कदम माना जा रहा है।
बिते दिनों लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने मिलकर एक नई पहल शुरू की है। इस अनूठे उपक्रम का नाम 'प्रसाद से ऊर्जा' (Prasad te Urja) रखा गया है, जिसके तहत बप्पा के प्रसाद और अन्नछत्र से निकलने वाले गीले कचरे से बिजली बनाई जाएगी
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