कोर्ट ने अभिनेता को ₹2 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने के लिए दो हफ्ते की आखिरी मोहलत दी है। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर, 2026 तय की है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी और निर्देशसुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने राजपाल यादव के पिछले रिकॉर्ड और बार-बार वादे से मुकरने के रवैये पर सख्त नाराजगी जताई। कोर्ट में एक्टिंग न करने की नसीहत: चीफ जस्टिस ने टिप्पणी करते हुए कहा, "आप फिल्मों में बहुत अच्छी एक्टिंग करते हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि कोर्ट में ऐसा नहीं करेंगे।" पीठ ने सख्त लहजे में कहा कि उनके पिछले आचरण को देखते हुए कोई उन पर कैसे भरोसा कर सकता है? अदालत ने साफ किया कि यह उनके लिए आखिरी मौका है। अभिनेता को देश से बाहर जाने से रोकने और देश में ही रहने की गारंटी के लिए अपना पासपोर्ट सरेंडर करने का निर्देश दिया गया है। यह मामला मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। राजपाल यादव ने साल 2010 में बतौर निर्माता-निर्देशक अपनी फिल्म 'अता पता लापता' बनाने के लिए कंपनी से ₹5 करोड़ का लोन लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई, जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ। भुगतान के लिए 2013 में दिए गए उनके 7 चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद यह कानूनी लड़ाई शुरू हुई। ब्याज और जुर्माने के साथ अब यह कुल बकाया राशि बढ़कर लगभग ₹9 करोड़ से अधिक हो चुकी है। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल यादव को 3 महीने की जेल की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
चेक बाउंस मामले में फंसे बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी और सख्त शर्तों के साथ अंतरिम राहत मिली है।
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