मुंबई: इस्लाम धर्म स्वीकार करने के बाद ओबीसी आगरी जाति प्रमाणपत्र को अमान्य घोषित किए जाने के मामले में उरण नगर परिषद की कांग्रेस नगरसेविका नंदा नामदेव म्हात्रे उर्फ नाहिदा इरफान ठाकुर को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने रायगढ़ जिला जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उनका जाति प्रमाणपत्र अवैध घोषित किया गया था।
न्यायमूर्ति रियाज छागला और न्यायमूर्ति फिरदौस पूनीवाला की खंडपीठ ने समिति को निर्देश दिया कि राज्य सरकार के 29 जनवरी 1983 और 3 जून 1996 के शासन निर्णयों (GR) को ध्यान में रखते हुए नंदा म्हात्रे को दोबारा सुनवाई का अवसर दिया जाए और 23 नवंबर तक नया निर्णय लिया जाए।
क्या है पूरा मामला?
उरण नगर परिषद के पिछले वर्ष हुए आम चुनाव में नंदा म्हात्रे 21 दिसंबर 2025 को प्रभाग क्रमांक ‘अ’ से OBC आगरी वर्ग से निर्वाचित हुई थीं। बाद में उन्होंने अंतरधार्मिक विवाह किया और इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया।
इसके बाद रायगढ़ जिला जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति ने 10 अगस्त 2026 के आदेश में उनका जाति प्रमाणपत्र अमान्य कर दिया। समिति के निर्णय के खिलाफ नंदा म्हात्रे ने अधिवक्ता चिंतामणि भनगोजी के माध्यम से बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया।
‘धर्म परिवर्तन से OBC लाभ अपने आप खत्म नहीं होता’
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि अंतरधार्मिक विवाह या धर्म परिवर्तन के कारण OBC का लाभ स्वतः समाप्त नहीं होता। अधिवक्ता भनगोजी ने अदालत में राज्य सरकार के 1983 और 1996 के GR का हवाला देते हुए कहा कि 1983 के शासन निर्णय के जरिए अंतरधार्मिक विवाह के मामलों में OBC लाभ को सभी धर्मों के लिए लागू किया गया था और 1996 के GR में भी इसका उल्लेख किया गया है।
उनका आरोप था कि जाति सत्यापन समिति ने इन शासन निर्णयों पर उचित विचार किए बिना जाति प्रमाणपत्र रद्द कर दिया।
सरकारी पक्ष ने समिति के फैसले का बचाव किया, लेकिन हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलील को स्वीकार करते हुए समिति का पुराना आदेश रद्द कर दिया और मामले की दोबारा सुनवाई के निर्देश दिए।
नगरसेवक पद पर भी फिलहाल राहत
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक जाति सत्यापन समिति नया फैसला नहीं देती, तब तक नगर परिषद नंदा म्हात्रे के नगरसेवक पद के संबंध में कोई निर्णय नहीं लेगी। यदि पुनः सुनवाई के बाद उनके खिलाफ फैसला आता है, तो उस फैसले की तारीख से अगले दो सप्ताह तक भी नगर परिषद उनके नगरसेवक पद के संबंध में कार्रवाई नहीं करेगी।
अब सबकी नजरें 23 नवंबर तक आने वाले जाति सत्यापन समिति के नए फैसले पर टिकी हैं।

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