ज़ीशान काज़मी
जलालाबाद, शामली.
प्राप्त जानकारी के अनुसार जनपद मुज़फ्फर नगर क़स्बा पुरक़ाज़ी में पूर्व चैयर मैन मरहूम तारिक मुस्तूफा के निवास पर अज़ीम शिक्षाविद्, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संस्थापक सर सैयद अहमद ख़ाँ की याद में ‘एक शाम सर सैयद अहमद ख़ाँ के नाम’ शीर्षक से एक शानदार मुशायरे का आयोजन किया गया। यह अदबी महफ़िल मरहूम तारिक़ मुस्तफ़ा, पूर्व चेयरमैन के आवास पर उनके छोटे भाई ख़ालिद मुस्तफ़ा के फ़रज़ंद जनाब दानियाल मुस्तफ़ा की सरपरस्ती में आयोजित हुई।
मुशायरे में दूर-दराज़ से आए मशहूर शायरों ने शिरकत की और अपने बेहतरीन कलाम से महफ़िल को यादगार बना दिया। क़स्बे के मशहूर शायर इफ़्तिख़ार सागर और अमजद ख़ान अमजद ने भी अपने ख़ूबसूरत अशआर पेश कर श्रोताओं को ख़ूब महज़ूज़ किया। शायरों के उम्दा कलाम पर महफ़िल में मौजूद लोगों ने ख़ूब दाद दी।
मुशायरे की ज़ेर-ए-निज़ामत मशहूर शायर जिगर देवबंदी ने की। कार्यक्रम का आग़ाज़ सर सैयद अहमद ख़ाँ की ज़िंदगी, उनकी इल्मी ख़िदमात और तालीमी मिशन पर रोशनी डालते हुए किया गया। इस मौक़े पर सर सैयद की तालीमी सोच और समाज में शिक्षा के फ़रोग़ के लिए उनकी कोशिशों को याद किया गया। साथ ही तराना पेश कर उन्हें ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया गया।
इस अदबी महफ़िल में क़स्बे के ज़िम्मेदार अफ़राद, गणमान्य लोग और बड़ी तादाद में नौजवान तबक़े के लोगों ने शिरकत की। सभी ने बड़े ज़ौक़ और दिलचस्पी के साथ शायरों का कलाम सुना।
यह मुशायरा उर्दू अदब, शायरी और सर सैयद अहमद ख़ाँ की तालीमी विरासत को याद करने का एक ख़ूबसूरत मौक़ा साबित हुआ। कार्यक्रम ने क़स्बे में अदबी माहौल को मज़बूती देने और नई नस्ल को उर्दू अदब व इल्म की अहमियत से रूबरू कराने का पैग़ाम दिया।
कार्य क्रम को सफल बनाने मे खालिद मुस्तूफा, दानियाल मुस्तूफा, हैदर खांन,साकिब मुस्तूफा , इकरार फरिदि, महताब आलम अज़ीज़ सिद्दीकी एवम उनकी पूरी टीम का सराहनीय विशेष योगदान रहा.

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