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गैस के लिए घंटों लाइन, महिला हुई बेहोश — श्रावस्ती की तस्वीरों ने खोली सिस्टम की पोल

Shoaib Miyanoor | | views
गैस के लिए घंटों लाइन, महिला हुई बेहोश — श्रावस्ती की तस्वीरों ने खोली सिस्टम की पोल

गैस के लिए घंटों लाइन, महिला हुई बेहोश — श्रावस्ती की तस्वीरों ने खोली सिस्टम की पोल




संवाददाता फरियाद अली


श्रावस्ती से सामने आई तस्वीरों ने सरकारी व्यवस्था और गैस वितरण प्रणाली की हकीकत को बेनकाब कर दिया है। जिस योजना को महिलाओं को सम्मान और सुविधा देने के नाम पर शुरू किया गया था, उसी योजना के लिए आज माताएं-बहनें सुबह से ही लंबी लाइनों में खड़ी रहने को मजबूर हैं। एक सिलेंडर लेने के लिए लोगों को घंटों धूप में इंतजार करना पड़ रहा है, धक्का-मुक्की झेलनी पड़ रही है और कई जगह हालात इतने खराब हैं कि लोग बेहोश तक हो रहे हैं।


ताजा मामला श्रावस्ती जिले का है, जहां गैस सिलेंडर लेने के लिए लगी लंबी लाइन में खड़ी एक महिला अचानक चक्कर खाकर जमीन पर गिर पड़ी और बेहोश हो गई। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे संभाला, पानी पिलाया और किसी तरह होश में लाने की कोशिश की। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए बेहद दर्दनाक था और यह सवाल खड़ा कर रहा था कि आखिर एक सिलेंडर के लिए जनता को इतनी बड़ी कीमत क्यों चुकानी पड़ रही है।


सरकार द्वारा बार-बार यह दावा किया जाता है कि उज्ज्वला योजना और अन्य योजनाओं के माध्यम से घर-घर गैस पहुंचाई जा रही है और महिलाओं को चूल्हे के धुएं से मुक्ति मिली है। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है। कई जिलों में गैस एजेंसियों के बाहर रोजाना लंबी कतारें लग रही हैं। लोगों का कहना है कि गैस की सप्लाई कम है और डीलरों की मनमानी के कारण आम उपभोक्ताओं को घंटों इंतजार करना पड़ता है।


स्थानीय लोगों का आरोप है कि वितरण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। गैस एजेंसियों पर अव्यवस्था का आलम है, कहीं टोकन सिस्टम नहीं है, कहीं जानकारी का अभाव है और कहीं एजेंसी कर्मचारियों का व्यवहार भी लोगों के साथ ठीक नहीं बताया जा रहा है। ऐसे में आम जनता, खासकर महिलाएं, सबसे ज्यादा परेशान हो रही हैं।


सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर सरकार ने घर-घर गैस पहुंचाने का वादा किया था, तो आज एक सिलेंडर के लिए जनता को सड़कों पर लाइन क्यों लगानी पड़ रही है। क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इन हालात की जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गई हैं।


श्रावस्ती की ये तस्वीरें सिर्फ एक जिले की कहानी नहीं हैं, बल्कि उस सिस्टम की पोल खोल रही हैं जो कागजों और भाषणों में तो मजबूत दिखाई देता है, लेकिन जमीन पर जनता को राहत देने में नाकाम साबित हो रहा है। अगर समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो ऐसे हालात और गंभीर हो सकते हैं।

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