उ. प्र. जनपद बहराइच मे भ्रष्ट तंत्र, जनता की गाढ़ी कमाई की बर्बादी और उस पर सरकारी पद की बेलगाम हेकड़ी! बहराइच जिले के हुजूरपुर ब्लॉक में जब दो साल की लंबी शिकायतों के बाद सड़क की बदहाली की जांच शुरू हुई, तो लोक निर्माण विभाग (PWD) के जिम्मेदारों ने तकनीकी पड़ताल छोड़कर शिकायतकर्ता और पत्रकारों पर ही रौब गालिब करना शुरू कर दिया। सड़क की उखड़ती गिट्टियों पर जवाब देने के बजाय अधिकारी ने कथित तौर पर यह शर्मनाक दलील दे डाली कि “सड़क पर गड्ढे तो होंगे ही, नहीं तो भारत अमेरिका बन जाएगा!”
यह पूरा मामला थाना रानीपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम ताजपुर गोबराहा का है। यहां सड़क निर्माण के वक्त से ही मानकविहीन सामग्री और भ्रष्टाचार को लेकर ग्रामीण लगातार आवाज उठा रहे थे। करीब दो साल तक फाइल दबाए रखने के बाद आखिरकार 10 सितंबर 2026 को जांच टीम मौके पर पहुंची। सरकारी गाड़ी से PWD के सहायक अभियंता (AE) कामले, प्रांतीय खंड (CD-1) के अवर अभियंता (JE) नीरज वर्मा और उनका ड्राइवर ताजपुर गोबराहा पहुंचे। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब डामर और बेस की गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच होगी, लेकिन अफसरों का मकसद सिर्फ कागजी खानापूर्ति करना था |
मौके पर पहुंचते ही जांच अधिकारियों ने शिकायतकर्ता को तलब किया और बिना किसी निष्पक्ष पड़ताल के, पहले से तैयार कागजों पर जबरन हस्ताक्षर कराने का दबाव बनाने लगे। जैसे ही शिकायतकर्ता ने सरकारी लीपापोती को भांपते हुए हस्ताक्षर करने से इनकार किया, दोनों इंजीनियर बिफर पड़े। सड़क की गुणवत्ता की जांच का मुद्दा तुरंत गायब हो गया और मौके पर मौजूद पत्रकारों की टीम पर आक्रामक हो गए। अधिकारियों ने खुलेआम धमकाते हुए मीडियाकर्मियों से उनका प्रेस पहचान पत्र (ID Proof) मांगा व कहा गया की तुम जैसे बहुत पत्रकार देखे है और सड़क की जांच छोड़ पत्रकारों की साख को मौके पर 'वेरीफाई' करने का तमाशा खड़ा कर दिया।
अफसरशाही की हेकड़ी पर सीधे सवाल:
क्या PWD के इंजीनियरों का काम सड़क की गुणवत्ता नापना है या पत्रकारों को धमकाकर उनका वेरिफिकेशन करना?
दो साल पुरानी घटिया सड़क के सैंपल लेने के बजाय शिकायतकर्ता पर जबरन दस्तखत का दबाव क्यों बनाया गया?
"गड्ढे नहीं होंगे तो अमेरिका बन जाएगा" जैसा बेतुका बयान देकर क्या अफसर अपने भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी पर पर्दा डाल रहे हैं?
ताजपुर गोबराहा की यह सड़क PWD के घटिया निर्माण और प्रशासनिक तानाशाही का जीता-जागता सबूत है। पत्रकारों को डराकर सच दबाने की यह कोशिश अब अधिकारियों के गले की फांस बनेगी। शिकायतकर्ताओं ने दो टूक चेतावनी दी है कि इस अफसरशाही गुंडागर्दी और मानकविहीन सड़क की शिकायत अब सीधे शासन के शीर्ष स्तर पर की जाएगी।

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