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हज़रत मखदूम शाह रहमतुल्लाह अलैही माहिम दरगाह पर हाजी ईब्राहीम शेख भाईजान की चादरपोशी

FAC News Desk | | views
हज़रत मखदूम शाह रहमतुल्लाह अलैही माहिम दरगाह पर हाजी ईब्राहीम शेख भाईजान की चादरपोशी

हज़रत मखदूम शाह रहमतुल्लाह अलैही माहिम दरगाह पर हाजी ईब्राहीम शेख भाईजान की चादरपोशी

 

प्रेसिडेंट सोहेल खंडवानी ने हाजी ईब्राहीम शेख भाईजान, एडिटर जफर सिद्दीकी और तमाम साथियों का किया पुर-वक़ार सम्मान

मुंबई: हज़रत मखदूम शाह रहमतुल्लाह अलैही माहिम दरगाह शरीफ़ पर जारी मुबारक उर्स शरीफ़ के पाक व मुबारक मौक़े पर रूहानियत, अदब और मोहब्बत से भरपूर एक यादगार शिष्टाचार मुलाक़ात का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हाजी ईब्राहीम शेख भाईजान ने पूरी अकीदत और एहतराम के साथ दरगाह शरीफ़ पर चादर शरीफ़ पेश कर अपनी सच्ची आस्था का इज़हार किया।

 

चादरपोशी के दौरान दरगाह परिसर नूरानी फ़िज़ा, दुआओं की गूँज और सलामो-सलात से गूंज उठा। हर ओर रूहानी सुकून और इमान की ताज़गी का एहसास देखा गया, जहाँ अमन-ओ-सलामती, भाईचारे और इंसानी हमदर्दी के लिए ख़ास दुआएँ की गईं। यह अमल सच्ची मोहब्बत, तहज़ीब और रूहानी जज़्बात की बेहतरीन मिसाल बनकर सामने आया।

 

इस मौक़े पर माहिम दरगाह के प्रेसिडेंट जनाब सोहेल खंडवानी साहब ने हाजी ईब्राहीम शेख भाईजान का पुर-वक़ार और ख़ुलूस भरे अंदाज़ में सम्मान किया। साथ ही समाज और मीडिया जगत में निष्पक्ष, निर्भीक और ज़िम्मेदार भूमिका निभाने के लिए एडिटर जफर सिद्दीकी का भी ख़ास सम्मान किया गया, जिसे उपस्थित लोगों ने दिल से सराहा।

 

अपने संबोधन में सदर सोहेल खंडवानी साहब ने कहा कि हाजी ईब्राहीम शेख भाईजान जैसी समाजसेवी शख़्सियतें समाज के लिए रहमत होती हैं, जो बिना किसी दिखावे के इंसानियत, भाईचारे और ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ के कामों में लगातार जुटी रहती हैं। उन्होंने कहा कि माहिम दरगाह सदैव अमन, मोहब्बत और इंसानी बराबरी का पैग़ाम देती आई है और आगे भी इसी रूह के साथ समाज की ख़िदमत करती रहेगी।

 

इस रूहानी मुलाक़ात के दौरान दरगाही रिवायतों, समाजी भाईचारे, आपसी तआवुन और मौजूदा दौर में इंसानियत की अहम ज़रूरतों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा हुई, जिसमें सभी ने समाज को जोड़ने की भावना पर ज़ोर दिया।

 

कार्यक्रम में एडिटर जफर सिद्दीकी, हाजी रफीक, जर्नलिस्ट अलीम भाई, रफीक मामू, इकराम मर्चेंट, जिया भाई, नासिर शेख, आलम सिद्दीकी समेत कई ज़िम्मेदार और समाजी शख़्सियतें मौजूद रहीं। इस अवसर पर सोहेल खंडवानी साहब ने सभी उपस्थित साथियों का भी पूरे अदब और एहतराम के साथ सम्मान किया।

 

मौजूद शख़्सियतों ने सोहेल खंडवानी साहब की दूरअंदेश क़यादत, रूहानी सोच और बेहतरीन इंतज़ामियाती व्यवस्था की दिल खोलकर तारीफ़ की और कहा कि उनकी सरपरस्ती में माहिम दरगाह आज न सिर्फ़ एक मुक़द्दस इबादतगाह है, बल्कि ख़िदमत-ए-ख़ल्क़, भाईचारे और इंसानी हमदर्दी का मज़बूत मरकज़ बन चुकी है।

 

बिला-शुबहा, यह पुरनूर मुलाक़ात और सम्मान समारोह रूहानियत, मोहब्बत और आपसी भाईचारे का पैग़ाम देता हुआ समाज को जोड़ने और दिलों को क़रीब लाने की एक ख़ूबसूरत और यादगार मिसाल बनकर याद रखा जाएगा।

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