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जामिया मिल्लिया इस्लामिया की कायाकल्प के नायक -प्रो. मज़हर आसिफ

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जामिया मिल्लिया इस्लामिया की कायाकल्प के नायक -प्रो. मज़हर आसिफ

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के 16वें वाइस चांसलर प्रो. मज़हर आसिफ ने अपने महज 20 माह के कार्यकाल में जामिया को जिस मुकाम पर पहुँचाया है, वह अपने आप में एक मिसाल है। 24 अक्टूबर 2024 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा 5 साल के लिए नियुक्ति के बाद से उनका एक ही मंत्र रहा है - "One Jamia, One Family"।


जामिया मिल्लिया इस्लामिया भले ही एक माइनॉरिटी संस्थान है, लेकिन इसका सेक्युलर किरदार ही इसकी सबसे बड़ी पहचान है। यहाँ शिक्षा के दरवाजे हमेशा सभी धर्म, जाति और वर्ग के लिए खुले हैं, जो 'वसुधैव कुटुम्बकम' की भावना को सच करता है। 2011 में NCMEI ने जामिया को माइनॉरिटी दर्जा दिया, जिससे इसे 50 प्रतिशत आरक्षण का अधिकार मिला, पर जामिया एक्ट 1988 आज भी कहता है कि विश्वविद्यालय सभी के लिए खुला है।


प्रो. आसिफ कोई नया नाम नहीं हैं। जामिया से पहले वे JNU में School of Languages में प्रोफेसर रहे हैं और फारसी भाषा, सूफीवाद और मध्यकालीन भारतीय इतिहास के विशेषज्ञ हैं। वे राष्ट्रीय शिक्षा नीति NEP 2020 की ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य और इम्प्लीमेंटेशन कमेटी के चेयरमैन रहे हैं। फारसी-असमिया-अंग्रेजी शब्दकोश समेत 9 किताबें उनकी विद्वता का प्रमाण हैं।


NEP और भारतीय ज्ञान परम्परा में ऐतिहासिक पहल

उनके नेतृत्व में जामिया NEP 2020 को 100 प्रतिशत लागू करने वाले देश के पहले केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शामिल हो गया है। भारत की सभ्यतागत विरासत को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के लिए IKS फ्रेमवर्क के तहत कई नए पाठ्यक्रम शुरू हुए हैं। राजभाषा हिंदी के प्रचार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को देखते हुए गृह मंत्रालय ने उन्हें 191 केंद्रीय कार्यालयों वाली नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, दिल्ली मध्य-1 का अध्यक्ष बनाया है।


विकास की नई बयार

उनके और रजिस्ट्रार प्रो. मो. महताब आलम रिज़वी के नेतृत्व में 40 साल से अटका काम पूरा हुआ। 1985 से बिना स्थायी फैकल्टी के चल रहे लाइब्रेरी कोर्स के लिए 6 स्थायी पद मंजूर कराकर पूरा Library and Information Science विभाग बनाया गया। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय से 14.8 करोड़ रुपये की लागत से EV रिसर्च लैब और साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग लैब की स्थापना, 100 बेड का गर्ल्स हॉस्टल, 250 क्षमता वाली AC लाइब्रेरी और PMJVK योजना के तहत स्मार्ट क्लासरूम मंजूर हुए।


कर्मचारी और छात्र सर्वोपरि

प्रो. आसिफ ने सबसे बड़ा सुधार कर्मचारियों के लिए किया। 55 से ज्यादा शिक्षकों और 300 से ज्यादा गैर-शिक्षण कर्मचारियों को लंबे समय से लंबित पदोन्नति दी गई और वर्षों से खाली पड़े पदों पर नई नियुक्तियाँ हुईं। संविदा और ग्रेड 3-4 के कर्मचारियों का वेतन, जो पहले महीनों तक लंबित रहता था, अब हर महीने के पहले सप्ताह में दिया जा रहा है। हर महीने सेवानिवृत्त हो रहे कर्मचारियों के लिए विदाई-सह-अभिनंदन समारोह और उसी दिन सेवानिवृत्ति लाभ का चेक देना एक नई परम्परा है।


छात्रों के लिए नया Evaluation Hall, ऑनलाइन प्रोविजनल मार्कशीट और सबसे तेज परिणाम - जामिया ने 80 प्रतिशत से ज्यादा प्रवेश परिणाम सबसे पहले घोषित किए।


वैश्विक पहचान

'वसुधैव कुटुम्बकम' के तहत डीन, अंतरराष्ट्रीय संबंध; डीन, शैक्षणिक मामले और डीन, पूर्व छात्र मामले के नए कार्यालय बने। 15 से अधिक देशों के राजदूतों की मेजबानी और नया ईरानोलॉजी हॉल स्थापित हुआ। परिणामस्वरूप THE World University Rankings 2026 में 401-500 बैंड में जगह बनाकर जामिया भारत की टॉप सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनी और Clarivate की ओर से Research Excellence में दोहरा सम्मान मिला।


प्रो. मज़हर आसिफ के आने के बाद जामिया सिर्फ एक यूनिवर्सिटी नहीं, बल्कि एक परिवार बनकर उभर रहा है।


पत्रकार

क़मर अहमद

9999788492

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