ब्यूरो रिपोर्ट फरियाद अली
उ.प्र. बहराइच। कागजों पर 80 मजदूर दिन भर पसीना बहा रहे हैं, लेकिन जब कार्यस्थल पर जाकर हकीकत देखी गई तो वहां एक भी मजदूर नजर नहीं आया। मामला विकासखंड फखरपुर की ग्राम पंचायत भिलोरा बसंती का है, जहां मनरेगा के तहत मिट्टी पटाई के कार्यों को लेकर ऑनलाइन पोर्टल और मस्टर रोल में दर्ज हाजिरी पर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, सरकारी पोर्टल पर दो अलग-अलग स्थानों पर मिट्टी पटाई का कार्य संचालित होने का विवरण दर्ज है। पहली साइट मनीराम के खेत से विजय कुमार के खेत तक और दूसरी साइट कृष्ण चंद्र के खेत से वारिस अली के खेत तक बताई गई है। इन दोनों कार्यस्थलों पर कुल 80 श्रमिकों के काम करने का दावा किया गया, लेकिन मौके पर निरीक्षण के दौरान एक भी मजदूर मौजूद नहीं मिला। इस स्थिति ने मनरेगा के तहत दर्ज श्रमिकों की उपस्थिति और कार्यों की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कार्यस्थल पर कोई मजदूर मौजूद नहीं था, तो ऑनलाइन मस्टर रोल में दर्ज हाजिरी किस आधार पर लगाई गई? क्या श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज करने में अनियमितता हुई है या फिर पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों और मौके की स्थिति में अंतर होने की कोई दूसरी वजह है? इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। मनरेगा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने और जरूरतमंद परिवारों को मजदूरी देने वाली महत्वपूर्ण सरकारी योजना है। ऐसे में यदि बिना काम किए श्रमिकों की हाजिरी दर्ज करने या सरकारी धन के गलत भुगतान की पुष्टि होती है, तो यह गंभीर मामला होगा। ग्रामीण स्तर पर योजना के क्रियान्वयन की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को मस्टर रोल, ऑनलाइन हाजिरी, कार्यस्थल की वास्तविक स्थिति और अब तक किए गए भुगतान की जांच करनी चाहिए। साथ ही, जिन श्रमिकों के नाम पर हाजिरी दर्ज की गई है, उनसे भी पूछताछ कर वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाना चाहिए। अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाते हैं या नहीं। फिलहाल, 80 मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी और मौके पर एक भी श्रमिक नहीं मिलने का दावा मनरेगा के कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।

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