मुंबई/महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर जारी विवाद के बीच गैर-मराठी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों ने RTO की कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई चालकों का आरोप है कि मराठी भाषा नहीं जानने के नाम पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
चालकों का कहना है कि उन्हें मराठी सीखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। उनका दावा है कि कम से कम 6 महीने का समय देकर भाषा सीखने का अवसर मिलना चाहिए।
बताया जा रहा है कि RTO की ओर से पहले एक महीने का नोटिस दिए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। निर्धारित अवधि में मराठी भाषा नहीं सीखने वाले चालकों के लाइसेंस/बैज के खिलाफ कार्रवाई की बात सामने आई है।
इस कार्रवाई के विरोध में कुर्ला में कुछ ऑटो-रिक्शा चालकों ने काम बंद करने का आंदोलन शुरू किया है। गैर-मराठी चालकों का आरोप है कि सरकार की कार्रवाई के पीछे राजनीति की जा रही है।
हालांकि, भाषा सीखने की आवश्यकता और नियमों के पालन को लेकर प्रशासन का रुख क्या है, यह स्पष्ट होना अभी बाकी है। अब सवाल यह है कि क्या सरकार और RTO चालकों को भाषा सीखने के लिए अधिक समय देंगे या कार्रवाई जारी रहेगी?
फिलहाल इस मुद्दे को लेकर महाराष्ट्र में भाषा, रोजगार और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर बहस तेज हो गई है।

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