मुंबई पुलिस की अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) के रंगदारी विरोधी दस्ते (एंटी-एक्सटॉर्शन सेल) ने जाल बिछाकर इस मामले में पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को संदेह है कि इस मामले के कुछ आरोपियों के तार अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन गिरोह से जुड़े हुए हैं, जिसके चलते उन पर मकोका (MCOCA) के तहत कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।
इस पूरे मामले की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
• विवाद की पृष्ठभूमि: यह पूरा विवाद बांद्रा पश्चिम के परेरा रोड इलाके में स्थित एक संपत्ति के पुनर्विकास को लेकर शुरू हुआ। यह विवादित जमीन 'बॉम्बे आर्चडायोसीज' के स्वामित्व में है, जिसके रीडेवलपमेंट के अधिकार 'दिलजय प्रॉपर्टीज डेवलपर्स' नाम की कंपनी ने लिए थे। हालांकि, इस प्रॉपर्टी पर स्टीफन परिवार और डेवलपर के बीच हक़ की लड़ाई चल रही थी, और यह सिविल मामला फिलहाल कोर्ट में लंबित है।
• रंगदारी की मांग और धमकी: अदालत में मामला चलने के बावजूद, आरोपियों ने डेवलपर से मांग की कि अगर वह बिना किसी रुकावट के पुनर्विकास का काम जारी रखना चाहता है, तो उसे एक बड़ी रकम देनी होगी। ऐसा न करने पर काम में बाधा डालने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी गईं।
• पुलिस का जाल और गिरफ्तारी: आपसी बातचीत के बाद रंगदारी की रकम 11 करोड़ रुपये तय हुई थी। इसकी पहली किस्त के रूप में 25 लाख रुपये लिए जाने थे। जब आरोपी सीधे डेवलपर के दफ्तर में यह रकम लेने पहुंचे, तो मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम ने पहले से मिली गोपनीय जानकारी के आधार पर जाल बिछाकर तीन आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ लिया। बाद में अन्य दो आरोपियों को उनके

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