मुंबई: सेशंस कोर्ट ने 39 साल के अफ़सर शेख़ उर्फ़ पंछी को जून 2020 में पारिवारिक विवाद के चलते अपनी पत्नी रेहाना के चाचा ज़ुल्फ़िकार चौधरी की हत्या करने के आरोप में उम्रकैद की सज़ा सुनाई है।
शेख़ के ख़िलाफ़ ज़ुल्फ़िकार के बेटे और रेहाना के कज़िन नसरुद्दीन की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। नसरुद्दीन का दावा था कि शेख़ ने परिवार की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ रेहाना से शादी की थी। इस शादी को लेकर आरोपी और मृतक के बीच अक्सर झगड़े होते रहते थे।
इसके अलावा, यह भी आरोप था कि रुबीना नाम की एक दूसरी लड़की के साथ उसके अवैध संबंध थे। मृतक ने आरोपी के रुबीना के साथ रहने पर आपत्ति जताई थी और उसे यह रिश्ता न जारी रखने की सलाह दी थी। घटना से लगभग एक महीने पहले, जब मृतक ने आरोपी से फिर से सवाल किया, तो आरोपी ने कथित तौर पर उसे धमकी दी कि अगर उसने उसके निजी मामलों में दखल दिया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।12 जून 2020 को सुबह करीब 9:30 बजे ज़ुल्फ़िकार काम पर निकला। एक घंटे बाद, एक महिला ने परिवार को आकर बताया कि शेख़ ने ज़ुल्फ़िकार को चाकू मार दिया है।
प्रत्यक्षदर्शियों का दावा था कि शेख़ ने उसे कई बार चाकू मारा और बीच-बचाव करने पर सभी को जान से मारने की धमकी दी। परिवार वाले उसे राजावाड़ी अस्पताल ले गए, लेकिन उसे मृत घोषित कर दिया गया।
मुकदमे के दौरान, अभियोजन पक्ष ने आरोपी और मृतक के बीच के मतभेदों को साबित करने के लिए प्रत्यक्षदर्शियों के साथ-साथ परिवार के कई सदस्यों और पड़ोसियों से पूछताछ की।अभियोजन पक्ष ने घटना के समय एक व्यक्ति द्वारा बनाए गए वीडियो का भी सहारा लिया, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया क्योंकि पुलिस ने उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया था और वीडियो रिकॉर्ड करने वाले गवाह से पूछताछ नहीं की थी।हालांकि, अदालत ने गवाहों के बयानों के आधार पर शेख़ को दोषी ठहराया और उसे कोई नरमी भी नहीं बरती। अदालत ने कहा, "ज़ुल्फ़िकार चौधरी की हत्या दिन-दहाड़े हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के शरीर के महत्वपूर्ण हिस्सों पर चाकू से किए गए ग्यारह बाहरी घावों का ज़िक्र है। नतीजतन, उन घावों के कारण उसकी मौत हो गई। मौत के समय मृतक दर्ज़ी का काम करता था। परिवार के मुखिया को खोने से उसके परिवार को अपूरणीय क्षति हुई है। हत्या की प्रकृति और समाज पर इसके गंभीर प्रभाव पर विचार किया जाना चाहिए।"

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