(रिपोर्ट : एडिटर जफरसिद्दीकी)
मुंबई : बारगाह-ए-रिसालत ﷺ में नज़राना-ए-अकीदत पेश करने, इश्क़-ए-रसूल ﷺ की रूहानी कैफ़ियत को आम करने तथा अमन, भाईचारे, इंसानियत और सामाजिक सद्भावना का पैग़ाम जन-जन तक पहुंचाने के मक़सद से सरहदी गांधी सद्भावना मंच एवं उर्दू मजलिस, मुंबई के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को नागपाड़ा स्थित अल-लतीफी हॉल, साबू सिद्दीकी कैंपस में भव्य ‘कुल हिंद नातिया मुशायरा’ मुनअक़िद हुआ।
नमाज़-ए-मगरिब के बाद शुरू हुई इस पुरनूर और रूहानी महफ़िल में अदब, साहित्य, समाजसेवा, तालीम और सियासत से जुड़ी बड़ी तादाद में मोतबर शख्सियात ने शिरकत की। देर रात तक जारी रही इस अदबी महफ़िल में नात-ए-पाक के खूबसूरत अशआर से पूरा माहौल इश्क़-ए-रसूल ﷺ और अकीदत से सराबोर रहा।
एडवोकेट सैयद जलालुद्दीन की पुरअसर इस्तकबालिया तक़रीर
कार्यक्रम का इस्तकबालिया ख़िताब सरहदी गांधी सद्भावना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट सैयद जलालुद्दीन ने पेश किया। अपनी पुरअसर, दिलनशीं और पुरख़ुलूस तक़रीर में उन्होंने तमाम मेहमानों, शायरों और सामईन का गर्मजोशी से इस्तकबाल किया।
उन्होंने इश्क़-ए-रसूल ﷺ, मोहब्बत, भाईचारे, इंसानी हमदर्दी, अमन और सामाजिक एकता की अहमियत को बेहद खूबसूरत अंदाज़ में पेश किया। उनकी पुरअसर ख़िताबत ने महफ़िल में ऐसा समां बांधा कि सामईन ने भरपूर दाद देकर उनकी हौसला-अफ़ज़ाई की।
शकील रशीद ने की मुशायरे की सदारत
मुशायरे की सदारत जनाब शकील रशीद, संपादक रोज़नामा मुंबई उर्दू न्यूज़, ने की। वहीं मशहूर बुद्धिजीवी एवं कोकण मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व चेयरमैन जनाब अली एम. शम्सी मेहमान-ए-ख़ुसूसी के तौर पर मौजूद रहे।
इसके अलावा सुल्तान मालदार, निज़ामुद्दीन राईन (प्रवक्ता, एमपीसीसी), अरशद अमीर समेत अनेक मोतबर और ज़ी-वक़ार शख्सियात ने अपनी मौजूदगी से महफ़िल की रौनक बढ़ाई।
मुशायरे की निज़ामत डॉ. ज़ाकिर खान ‘ज़ाकिर’ ने अपने पुरअसर, दिलकश और शायराना अंदाज़ में की। उन्होंने शायरों को बारी-बारी से दावत-ए-सुख़न देकर महफ़िल को अदबी रंग से सराबोर कर दिया।
मुख़्तलिफ़ शहरों से पहुंचे नामचीन शायर
‘कुल हिंद नातिया मुशायरा’ में देश के मुख़्तलिफ़ शहरों से पहुंचे नामचीन शायरों ने अपने नातिया कलाम पेश किए। हैदराबाद से आगा सरोश, बेंगलुरु से गुफरान अमजद, बनारस से जमील अख्तर बनारसी और आज़मगढ़ से डॉ. अरशद जमाल ‘सारिम’ ने अपने उम्दा कलाम से सामईन को महज़ूज़ किया।
मुंबई के स्थानीय शायरों नदीम सिद्दीकी, एजाज़ हिंदी, हामिद इकबाल सिद्दीकी, डॉ. क़ासिम इमाम, इरफ़ान जाफ़री, उबैद आज़म आज़मी, डॉ. क़मर सिद्दीकी, आलम निज़ामी, मक़सूद आफ़ाक और आमिर मसूद ने भी अपने दिलकश नातिया कलाम पेश किए।
शायरों की पुरकैफ़ और रूहानी प्रस्तुतियों के दौरान पूरा हॉल नारों-ए-तकबीर और दाद-ओ-तहसीन से गूंजता रहा। सामईन ने शायरों के अशआर पर दिल खोलकर दाद दी और उनकी हौसला-अफ़ज़ाई की।
बड़ी तादाद में मोतबर हस्तियों की शिरकत
इस यादगार अदबी महफ़िल में महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों से सामाजिक, शैक्षणिक, साहित्यिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़ी अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने शिरकत की।
इस अवसर पर खुर्शीद सिद्दीकी, प्रिंसिपल असलम शेख, सलीम माप खान, फाज़िल अंसारी, सईद खान, आमिर इदरीसी, रिज़वान लाला, डॉ. ज़ेबा मलीक, डॉ. तायब बुखारी, हारून आज़मी, अकील शेख, अलीम शेख, समाजसेवक अब्दुल गफ्फार खान, कमाल अहमद मांडलीकर, शाहनवाज़ सिद्दीकी, डॉ. शेख नसीर अहमद, परवेज़ अख्तर अंसारी, क़ाज़ी मोहम्मद आसिम, ज़ाहिद सुल्तान, महमूद खान, मौलाना मोहम्मद आरिफ़ साक़िबी, जफर सिद्दीकी (एडिटर, दैनिक बुलंद दुनिया), उसमान खान लाला, अनीस अहमद खान, शेख अब्दुल्लाह, डॉ. खालिद शेख, डॉ. आबिद सैयद, डॉ. ज़ीनत शौकत अली, वजीहुद्दीन, प्रिंसिपल मोमिन मोहम्मद मुर्तज़ा, मोहम्मद रफ़ीक शेख, सुलैमान फारूकी, जावेद एम. खान और मुनसिफ़ कुरैशी सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
आयोजकों ने जताया शुक्रिया
कार्यक्रम के अंत में मोहम्मद सुलैमान फारूकी ने तमाम मेहमानों, शायरों, सामईन और सहयोगियों का इज़हार-ए-शुक्रिया अदा किया। मुशायरे के कन्वीनर सुल्तान मालदार एवं अरशद अमीर रहे।
आयोजकों ने कहा कि ‘कुल हिंद नातिया मुशायरा’ का बुनियादी मक़सद मोहब्बत-ए-रसूल ﷺ के साथ अमन, भाईचारे, इंसानियत और सामाजिक सद्भावना के पैग़ाम को आम करना है।
नामचीन शायरों की दिलकश नातिया पेशकश, मेहमानों की पुरख़ुलूस मौजूदगी और सामईन की भरपूर दाद ने नागपाड़ा की इस महफ़िल को एक यादगार, रूहानी और अदबी शाम में तब्दील कर दिया।

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